Share Market Crash
Share Market Crash: हफ्ते के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार में ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति देखने को मिली। सोमवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मच गया। सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये पल भर में स्वाहा हो गए। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 1400 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कुछ ही मिनटों में बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि यह गिरावट 1600 अंकों के पार निकल गई। सुबह 9:20 बजे तक सेंसेक्स 1,624.21 अंक (2.09%) टूटकर 75,926.04 के स्तर पर आ गया। वहीं, निफ्टी भी 471.15 अंक (1.96%) की भारी गिरावट के साथ 23,579.45 के करीब ट्रेड करता दिखा।
बाजार की शुरुआत से पहले ही निवेशकों में डर का माहौल था। प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स 1600 अंक नीचे चला गया था, जिसने पहले ही संकेत दे दिया था कि आज का दिन निवेशकों के लिए भारी होने वाला है। सुबह 9:15 बजे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 373.25 अंक लुढ़ककर 23,677.35 पर खुला। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, जिससे चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है।
बाजार में आई इस सुनामी में कोई भी सेक्टर अछूता नहीं रहा। बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दिग्गज शेयर जैसे HDFC Bank, Maruti Suzuki, Eicher Motors, Shriram Finance और Bajaj Finance टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे। बड़े शेयरों के साथ-साथ स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी 2% तक नीचे गिर गए। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अनिश्चितता के माहौल में बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
बाजार में इस भयंकर क्रैश की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी करने की धमकी दे दी। साथ ही, इजरायल और ईरान के बीच दोबारा संघर्ष शुरू होने की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया। इस वैश्विक अस्थिरता ने निवेशकों को जोखिम भरे संपत्तियों (Stocks) से दूर कर सुरक्षित ठिकानों (जैसे गोल्ड) की ओर जाने पर मजबूर कर दिया है।
वैश्विक तनाव का सबसे बुरा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) 8% की छलांग लगाकर 104.24 डॉलर पर पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से देश का व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपया कमजोर होता है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में अन्य एशियाई बाजारों के मुकाबले ज्यादा घबराहट देखी जा रही है।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में लाल निशान नजर आ रहा है। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखी जा रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पूरे हफ्ते बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें और युद्ध के हालातों के साथ-साथ आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखें।
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