Share Market Crash
Share Market Crash: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी संभलकर हुई। दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों ने सावधानी बरतने का फैसला किया क्योंकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनयिक तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) को प्रभावित किया है। शुरुआती कारोबारी सत्र में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 82,487.70 के स्तर पर देखा गया, वहीं निफ्टी 50 भी 25,450 के मनोवैज्ञानिक स्तर के इर्द-गिर्द संघर्ष करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व के हालात स्थिर नहीं होते, बाजार में इसी तरह का ‘रिस्क-ऑफ’ मोड (Risk-off mode) जारी रह सकता है।
आज के कारोबार में बाजार का रुझान मिला-जुला रहा। जहाँ एक ओर आईटी (IT) सेक्टर में कमजोरी बनी रही और इन्फोसिस व टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयर लाल निशान में रहे, वहीं दूसरी ओर डिफेंस और सरकारी बैंकों (PSU Banks) ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी इंडिया डिफेंस जैसे इंडेक्स गेनर्स की सूची में सबसे ऊपर थे।
प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन:
टॉप गेनर्स: एलएंडटी (L&T), बीईएल (BEL), एनटीपीसी, और अदाणी पोर्ट्स।
टॉप लूजर्स: इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एमएंडएम, और एशियन पेंट्स।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, मौजूदा गिरावट को डर के रूप में नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चेतावनियों और ब्रेंट क्रूड के 72 डॉलर के करीब पहुँचने से बाजार में तात्कालिक अस्थिरता आई है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व (Fundamentals) आज भी बहुत मजबूत हैं। डॉ. विजयकुमार का मानना है कि तीसरी तिमाही (Q3) के कॉर्पोरेट नतीजे उत्साहजनक रहे हैं, जो भविष्य में रिकवरी का संकेत देते हैं। उन्होंने लंबी अवधि के निवेशकों को बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, और टेलीकॉम जैसे ‘फेयरली वैल्यूड’ सेक्टर्स में निवेश बढ़ाने की सलाह दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 71.81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव डालती हैं। वैश्विक स्तर पर भी एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई; टोक्यो, हांगकांग और बैंकॉक के बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने गुरुवार को बाजार में शुद्ध विक्रेता (Net Sellers) के रूप में भूमिका निभाई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक निफ्टी 25,330 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है। यदि आने वाले सत्रों में यूएस-ईरान विवाद सुलझता है, तो बाजार में एक तेज ‘शॉर्ट-कवरिंग’ रैली देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे एकमुश्त निवेश के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए अच्छे स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते रहें।
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