Shashi Tharoor On Ramachandra Guha: देश के राजनीतिक गलियारों में बयानों और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा द्वारा राहुल गांधी को लेकर दिए गए एक विवादित बयान की शनिवार (6 जून) को कड़ी आलोचना की है। दरअसल, रामचंद्र गुहा ने एक हालिया इंटरव्यू में राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभव, उनकी अब तक की यात्रा और योग्यता पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। गुहा का तर्क था कि राहुल गांधी के पास देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए आवश्यक और पारंपरिक प्रशासनिक अनुभव की भारी कमी है। इतिहासकार के इसी दावे को आड़े हाथों लेते हुए शशि थरूर ने पलटवार किया है।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने राहुल गांधी की योग्यता पर उठाए थे गंभीर सवाल
एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में रामचंद्र गुहा ने राहुल गांधी के देश के सर्वोच्च पद यानी प्रधानमंत्री बनने की राह में उनकी प्रशासनिक और कूटनीतिक कमियों का विशेष रूप से उल्लेख किया था। गुहा ने कहा था कि गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों और कूटनीतिक मोर्चों से निपटने के लिए राहुल गांधी के पास कोई ठोस प्रशासनिक अनुभव या विदेश नीति की कुशलता नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया था कि अपनी मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि, नेहरू-गांधी परिवार से ताल्लुक रखने और व्यक्तिगत शालीनता के अलावा राहुल गांधी के पास ऐसी कौन सी खास योग्यताएं हैं जो उन्हें देश के प्रधानमंत्री पद के लिए पूरी तरह योग्य और उपयुक्त उम्मीदवार बनाती हैं।

शशि थरूर का एक्स पर पलटवार
रामचंद्र गुहा के इस तीखे बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। थरूर ने इतिहासकार के दावों को पूरी तरह खारिज करने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरणों का सहारा लिया। थरूर ने अकाट्य तर्क देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने के लिए पहले से कोई कार्यकारी पद संभालने या विदेश नीति का गहरा विशेषज्ञ होना अनिवार्य शर्त नहीं है।
ओबामा और मोदी के अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर थरूर ने रामचंद्र गुहा को घेरा
शशि थरूर ने रामचंद्र गुहा को टैग करते हुए एक्स पर लिखा, “कम ऑन रामचंद्र गुहा, यह तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है और आपकी यह दलील गले नहीं उतरती।” थरूर ने आगे सवाल दागते हुए कहा कि जब दुनिया के सबसे पुराने और शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा बने थे, तब इलिनोइस राज्य से पहली बार सीनेटर चुनकर आए ओबामा को वैश्विक मामलों या विदेश नीति का कितना अनुभव था? इसके साथ ही भारतीय संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए थरूर ने पूछा कि भारत के जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक कूटनीति को संभालने से पहले, गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के पास कुल कितना अंतरराष्ट्रीय अनुभव था?
एक दशक से राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं राहुल
अपने दावों को और मजबूत करते हुए शशि थरूर ने आगे तर्क दिया कि राहुल गांधी पिछले एक दशक से भी अधिक समय से देश की सबसे पुरानी और एक बड़ी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। इस लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उनके दुनिया भर के कई शीर्ष वैश्विक नेताओं और रणनीतिकारों के साथ सीधे व बेहतरीन संपर्क स्थापित हुए हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी के पास पार्टी के भीतर और बाहर उच्च स्तरीय विशेषज्ञों, कूटनीतिज्ञों और अनुभवी सलाहकारों की कोई कमी नहीं है, जो किसी भी बड़े नीतिगत फैसले में उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
अकेले फैसला नहीं लेता कोई प्रधानमंत्री
शशि थरूर ने शासन व्यवस्था की मूल कार्यप्रणाली को समझाते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री किसी भी वैश्विक संकट का सामना अकेले दम पर नहीं करता है। वह पूरी कैबिनेट और विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर काम करता है, और इसी सामूहिक शक्ति के कारण ही वह सरकार का मुखिया कहलाता है। थरूर ने अंत में लिखा कि राहुल गांधी की योग्यता को लेकर जानबूझकर खड़ा किया गया यह विवाद पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और अब समय आ गया है कि इस निरर्थक बहस और विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए।












