India Instagram Policy : लेखिका शेफाली वैद्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सरकार विरोधी रील्स की बढ़ती संख्या और उनके यूजर्स तक पहुंचने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार परसेप्शन की लड़ाई हार रही है। उनके मुताबिक, इंस्टाग्राम पर हर दिन सरकार के खिलाफ सैकड़ों ऐसी रील्स दिखाई दे रही हैं, जिन्हें संबंधित क्रिएटर्स को फॉलो नहीं करने वाले यूजर्स भी अपनी टाइमलाइन पर देख रहे हैं।

इंस्टाग्राम की नीतियों पर लगाया पक्षपात का आरोप
शेफाली वैद्य ने भारत में इंस्टाग्राम की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म ने एक पक्ष चुन लिया है। उन्होंने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि या तो मंत्रालय इस स्थिति से अनजान है या फिर अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस पोस्ट में बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष को भी टैग किया।

सौरव दास ने एक्स पर दिया जवाब
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास ने शेफाली वैद्य की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, “डरो। बहुत ज्यादा डरो। आखिरकार सच सामने आ रहा है और युवा इस लहर का नेतृत्व कर रहे हैं।” उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर सरकार और इंस्टाग्राम की भूमिका को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। सौरव दास ने अपनी प्रतिक्रिया में युवाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
ध्रुव राठी के वीडियो को रीपोस्ट कर सरकार पर निशाना
सौरव दास ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक वीडियो पोस्ट को भी रीपोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने टिप्पणी की कि कथित तानाशाह इंस्टाग्राम रील्स से बेहद डरा हुआ है और सवाल किया कि क्या जेन-जी अब उसके दोस्त नहीं रहे। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच राजनीतिक सामग्री की पहुंच और सरकार के प्रति उनके नजरिए को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में सामने आई।
ध्रुव राठी ने पोस्ट हटाए जाने को लेकर क्या दावा किया?
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में दावा किया कि इंस्टाग्राम से बड़ी संख्या में पोस्ट हटाई जा रही हैं और इसके पीछे सरकार की ओर से दिए जा रहे निर्देश जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-राजनीतिक सामग्री भी इस कार्रवाई की चपेट में आ रही है। राठी के अनुसार, पोस्ट हटाने की प्रक्रिया में सरकार के समर्थन में प्रकाशित कुछ सामग्री भी हटाई जा रही है। हालांकि, ये उनके वीडियो में किए गए दावे हैं; प्रस्तुत जानकारी में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

सोशल मीडिया कंटेंट मॉडरेशन पर पुरानी बहस
इंस्टाग्राम पर सामग्री हटाए जाने को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। CJP से जुड़े नेताओं और कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की आलोचना करने वाली पोस्ट हटाई गईं या उन पर प्रतिबंध लगाया गया। दूसरी ओर, सामग्री हटाने के मामलों में प्लेटफॉर्म की कम्युनिटी गाइडलाइंस और सरकारी कानूनी नोटिस भी प्रासंगिक हो सकते हैं। ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी है कि कार्रवाई प्लेटफॉर्म की नीति, स्वचालित मॉडरेशन या किसी कानूनी आदेश के तहत हुई है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर चर्चा
इस पूरे विवाद ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक विचारों की पहुंच, कंटेंट मॉडरेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। शेफाली वैद्य ने सरकार विरोधी रील्स की पहुंच पर सवाल उठाए, जबकि सौरव दास और ध्रुव राठी ने पोस्ट हटाए जाने को लेकर सरकार पर आरोप लगाए। इंस्टाग्राम या केंद्र सरकार की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

