Bangladesh Election 2026
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है। अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किए जाने पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि लाखों लोगों के बुनियादी मताधिकारों को जबरन छीना गया है। हसीना के अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक समाज में एक बड़े राजनीतिक दल को प्रतिबंधित करना न केवल अन्याय है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिए एक ईमेल संदेश में शेख हसीना ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हुए, तो बांग्लादेश लंबे समय तक अस्थिरता की आग में जलता रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि जब आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से रोक दिया जाता है, तो इससे संस्थानों की वैधता समाप्त हो जाती है। हसीना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बहिष्कार और दमन की नींव पर बनी कोई भी सरकार विभाजित राष्ट्र को एकजुट करने में कभी सफल नहीं हो सकती।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 2024 के बड़े विद्रोह और तख्तापलट के बाद यह पहला मौका है जब 127 मिलियन से अधिक मतदाता अपने भविष्य का फैसला करेंगे। इस बार मतदान केवल प्रतिनिधियों को चुनने के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक सुधारों पर होने वाले जनमत संग्रह के लिए भी होगा। हालांकि, अवामी लीग की अनुपस्थिति ने इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अगस्त 2024 में सत्ता संभालने वाले नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस ने वादा किया है कि चुनाव पूरी तरह पारदर्शी होंगे। यूनुस के कार्यालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदायों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा बल शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करेंगे और किसी भी तरह की हिंसा या जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लगभग 500 विदेशी पर्यवेक्षक, जिनमें यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ के प्रतिनिधि शामिल हैं, इस चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर बढ़ते हमलों और प्रेस की स्वतंत्रता के हनन को लेकर चिंता जताई है। अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यकर्ताओं की मनमानी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। वहीं, आलोचकों का मानना है कि यूनुस सरकार के तहत कट्टरपंथी समूहों का प्रभाव बढ़ा है, जिससे देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बने को खतरा पैदा हो गया है।
इस चुनावी समर में ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौट चुके हैं और देश की स्थिरता का नेतृत्व करने का दावा कर रहे हैं। उनके मुकाबले में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन खड़ा है। अब देखना यह है कि अवामी लीग के बिना होने वाला यह चुनाव बांग्लादेश को लोकतंत्र की नई दिशा देता है या अराजकता की ओर धकेलता है।
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