F-35 Trust Issues : अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को हाल ही में एक के बाद एक झटके लगे हैं। पहले भारत ने अमेरिकी GE-414 इंजन के बजाय फ्रांसीसी कंपनी Safran के साथ स्वदेशी इंजन निर्माण का रास्ता चुना, और अब यूरोप के दो अहम देश – स्पेन और स्विट्जरलैंड – ने भी F-35 से दूरी बनाते हुए यूरोपीय विकल्पों को प्राथमिकता दी है। यह घटनाक्रम केवल सैन्य सौदों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों में गहरा संकेत भी देता है।

स्पेन: घरेलू उद्योग को प्राथमिकता
स्पेन ने अचानक अपनी F-35B खरीदने की योजना रद्द कर दी, जबकि पहले माना जा रहा था कि वह अपने नौसेना विमानवाहक पोत Juan Carlos I के लिए इस विमान को खरीदेगा। इसके बजाय स्पेन ने 25 Eurofighter Typhoon खरीदने और Future Combat Air System (FCAS) प्रोग्राम में निवेश का फैसला किया है। यह निर्णय स्पेन की सैन्य शक्ति को अल्पकालिक नुकसान दे सकता है, लेकिन इसके बदले में घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

स्विट्जरलैंड: कीमत और भरोसे का संकट
2022 में जनमत संग्रह के बाद स्विट्जरलैंड ने 36 F-35A विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन अब यह सौदा विवादों में घिरता दिख रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में सूचित किया कि डील की कीमत लगभग 650 मिलियन स्विस फ्रैंक तक बढ़ सकती है, जो पहले तय लागत से कहीं अधिक है। साथ ही, अमेरिका द्वारा स्विस निर्यात पर लगाए गए नए टैरिफ ने भी भरोसे को कमजोर किया है। नतीजतन, बर्न में कई राजनेता अब इस डील की समीक्षा या रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
भारत: फ्रांस के साथ नई रणनीतिक साझेदारी
भारत ने भी अब अमेरिकी F-35 या GE-414 इंजन की जगह Safran के साथ मिलकर 120 kN थ्रस्ट वाला स्वदेशी इंजन विकसित करने का फैसला किया है। यह इंजन भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर प्रोग्राम को ताकत देगा। इससे भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी और गहराई पाएगी, जबकि अमेरिका को संभावित बड़े सौदे से हाथ धोना पड़ा।
F-35: तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद बढ़ते जोखिम
F-35 तकनीकी रूप से उन्नत जरूर है, लेकिन इसकी लाइफसाइकिल लागत, सॉफ़्टवेयर नियंत्रण, और अमेरिकी “सस्टेनमेंट मोनोपोली” को लेकर लगातार आलोचना होती रही है। यूरोपीय देश अब इस निर्भरता से मुक्त होने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। FCAS जैसे प्रोजेक्ट जहां रणनीतिक स्वतंत्रता और तकनीकी नवाचार का वादा करते हैं, वहीं Eurofighter जैसे विकल्प अभी भी व्यवहारिक और यूरोपीय नियंत्रण में हैं।
स्पेन, स्विट्जरलैंड और भारत के हालिया फैसले इस बात की ओर संकेत करते हैं कि अब देश केवल तकनीक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वतंत्रता और भरोसेमंद साझेदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। अमेरिका के लिए यह चेतावनी है कि महज तकनीकी बढ़त ही पर्याप्त नहीं है — भरोसे और नियंत्रण की राजनीति अब रक्षा सौदों की नई कसौटी बन चुकी है।
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