Shukra Pradosh Vrat 2025: विवाहित स्त्रियों के लिए क्यों विशेष होता है शुक्र प्रदोष व्रत? जानें शुभ फल और पूजा का समय

Shukra Pradosh Vrat 2025: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सितंबर माह का अंतिम प्रदोष व्रत शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को पड़ रहा है, जो कि शुक्रवार होने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा।

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शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो इसका फल कई गुना अधिक होता है, विशेषकर विवाहित स्त्रियों के लिए। आइए जानते हैं कि यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए क्यों अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

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विवाहित स्त्रियों के लिए क्यों विशेष है शुक्र प्रदोष व्रत?

1. शुक्र ग्रह का प्रभाव:

ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार को शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। शुक्र ग्रह प्रेम, सौंदर्य, वैवाहिक सुख और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक है। यदि किसी महिला की कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत हो, तो उसका दांपत्य जीवन सुखमय, संतुलित और तनावमुक्त रहता है।

2. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति:

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।

3. प्रेम और सामंजस्य में वृद्धि:

जो महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करती हैं, उनके जीवन में पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। यह व्रत वैवाहिक जीवन में आने वाले मानसिक और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में सहायक होता है।

शास्त्रों में क्या कहा गया है?

शिवपुराण और स्कंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में शुक्र प्रदोष व्रत का वर्णन अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी रूप में किया गया है। यह व्रत सिर्फ वैवाहिक सुख के लिए नहीं, बल्कि धन, समृद्धि और सुखद पारिवारिक जीवन के लिए भी अत्यंत लाभकारी बताया गया है।

Shukra Pradosh Vrat 2025: पूजा का शुभ मुहूर्त

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत आवश्यक होता है। यह समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले शुरू होकर, सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक होता है।

 व्रत तिथि: शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

पूजा का शुभ समय: शाम 6:21 PM से 8:43 PM तक

कैसे करें पूजा?

इस दिन व्रती को उपवास रखना चाहिए।

संध्या समय में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थल पर शिवलिंग का अभिषेक करें – जल, दूध, शहद, गंगाजल आदि से।

माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा करें और व्रत कथा सुनें।

घी का दीपक जलाएं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

शुक्र प्रदोष व्रत 2025 विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों के लिए एक शुभ अवसर है, जब वे भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर अपने वैवाहिक जीवन को और भी सुखमय बना सकती हैं। इस दिन का व्रत न केवल पति की दीर्घायु के लिए फलदायी है, बल्कि यह सम्पूर्ण पारिवारिक सुख-शांति और लक्ष्मी की प्राप्ति का माध्यम भी बनता है।

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