Sindh Desh Protest:
Sindh Desh Protest: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में ‘अलग सिंधुदेश’ की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। रविवार को शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद कराची में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। सिंधी संस्कृति दिवस के अवसर पर सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसमें पथराव और सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ भी शामिल थी। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग सिंध प्रांत को पाकिस्तान से अलग कर एक स्वतंत्र देश ‘सिंधुदेश’ बनाना है।
ये विरोध प्रदर्शन जिये सिंध मुत्तहिदा महाज (Jiye Sindh Muttahida Mahaz – JSSM) के बैनर तले आयोजित किए गए थे। सिंधी समुदाय के एक बड़े समूह ने हाथों में तख्तियां लेकर ‘आजादी’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के जोरदार नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से ‘सिंध की आजादी’ की मांग करते हुए अपनी आवाज बुलंद की। सिंधुदेश की मांग एक लंबे समय से चली आ रही सिंधी राष्ट्रवादी पार्टियों की भावना को दर्शाती है, जिसे इस विशाल विरोध प्रदर्शन ने और अधिक बल दिया है। इन नारों और मांगों ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब स्थानीय अधिकारियों ने रैली के निर्धारित मार्ग को बदलने के लिए प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाना शुरू किया। इस कार्रवाई से हजारों प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो उठे, और हालात तुरंत बिगड़ गए। गुस्साई भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया।
हिंसा को बढ़ता देख और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान सरकारी संपत्तियों और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की भी खबरें सामने आईं। कराची के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई इस झड़प ने शहर में डर और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई व्यापक हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने अब तक कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में पाँच पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार ने पुलिस को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ करने के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए। इस तरह की कड़ी कार्रवाई का उद्देश्य भविष्य में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
सिंध प्रांत, जो सिंधु नदी के पास का ऐतिहासिक क्षेत्र है, 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बन गया था। महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, ‘सिंध देश’ आधुनिक सिंध का प्राचीन नाम था, जो वर्तमान में पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है।
भारत में भी यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब पिछले महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक सिंधी समाज सम्मेलन कार्यक्रम में बोलते हुए एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि सिंध क्षेत्र एक दिन भारत लौट आएगा। राजनाथ सिंह ने कहा था कि उनकी पीढ़ी के कई सिंधी हिंदुओं ने 1947 के उस निर्णय को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण सिंध पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। उन्होंने आगे कहा था कि, “आज सिंध भले ही भारत का हिस्सा न हो, लेकिन सभ्यता के तौर पर सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। जहां तक जमीन की बात है, सरहदें बदल सकती हैं। कौन जानता है, कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए।” यह बयान कराची में हो रहे अलगाववादी प्रदर्शनों के संदर्भ में एक नया भू-राजनीतिक आयाम जोड़ता है।
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