Jharkhand News
Jharkhand News : झारखंड के सिंहभूम जिले में इन दिनों जमीन के नीचे दबा एक खौफनाक इतिहास बाहर निकल रहा है। एक तरफ जहां पूरी दुनिया मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और मिसाइल हमलों की खबरों से सहमी हुई है, वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राज्य झारखंड में लगातार मिसाइलों और बमों के मिलने से हड़कंप मच गया है। पिछले दो महीनों के भीतर अकेले सिंहभूम जिले में यह तीसरी मिसाइल बरामद हुई है। इस बार ताजा मामला बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुवर्णरेखा नदी के पास का है, जहां एक विशालकाय मिसाइल मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
बहरागोड़ा के पानीपोड़ा गांव में यह घटना तब सामने आई जब कुछ मछुआरे हर रोज की तरह सुवर्णरेखा नदी में मछली पकड़ने गए थे। मछली पकड़ने के दौरान उन्हें पानी के बीच में एक बहुत बड़ी और भारी धातु की वस्तु दिखाई दी। मछुआरों ने जिज्ञासावश और उसे कोई कीमती चीज समझकर भारी मशक्कत के साथ खींचकर नदी के किनारे तक पहुँचाया। किनारे पर लाते ही उनके होश उड़ गए क्योंकि वह कोई साधारण धातु नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली मिसाइल थी। ग्रामीणों के अनुसार, इस मिसाइल का वजन करीब 200 किलोग्राम या उससे भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बिना किसी देरी और जोखिम के मछुआरों ने तुरंत स्थानीय बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके को खाली करा लिया गया। सुरक्षा के लिहाज से नदी के किनारे कड़ी निगरानी रखी जा रही है और आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे एक सक्रिय विस्फोटक मानकर चल रही है, जिसके कारण घटनास्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
बार-बार मिसाइलों के मिलने पर विशेषज्ञों का मानना है कि यह झारखंड के उस ऐतिहासिक दौर से जुड़ा है जब भारत दूसरे विश्व युद्ध का गवाह बना था। जानकारों का दावा है कि ये मिसाइलें दूसरे विश्व युद्ध (World War II) के समय की हो सकती हैं। उस दौर में इस इलाके में मित्र देशों की सेनाओं की गतिविधियां और हवाई पट्टियां सक्रिय थीं। यह संभव है कि उस समय के बिना फटे बम (Unexploded Ordnance) समय के साथ जमीन और नदियों की तलहटी में दब गए हों, जो अब मिट्टी के कटाव या नदी के जलस्तर में बदलाव के कारण सतह पर आ रहे हैं।
पिछले 60 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब सिंहभूम में इस तरह का विस्फोटक मिला है। इससे पहले 17 और 18 मार्च के बीच भी सुवर्णरेखा नदी के किनारे एक मिसाइल मिली थी। वहीं, मार्च के आखिरी हफ्ते में भी एक और मिसाइल बरामद हुई थी, जिसे भारतीय सेना की बम डिस्पोजल टीम ने काफी मशक्कत के बाद सुरक्षित रूप से डिफ्यूज किया था। लगातार मिल रहे इन बमों ने स्थानीय लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है।
बार-बार मिल रहे इन जानलेवा विस्फोटकों से परेशान पानीपोड़ा और आसपास के ग्रामीणों ने अब सरकार और प्रशासन से बड़ी मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को पूरे इलाके और विशेषकर सुवर्णरेखा नदी की तलहटी का वैज्ञानिक सर्वे और पूरी तरह से तलाशी अभियान (Scoping/Scanning) चलाना चाहिए। ग्रामीणों को डर है कि नदी की गहराई में और भी कई बम दबे हो सकते हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। जब तक पूरे इलाके को ‘क्लियर’ घोषित नहीं किया जाता, तब तक लोगों का डर खत्म होना मुश्किल है।
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