Ambikapur News : रामगढ़ क्षेत्र की पुरातात्विक धरोहर को कोल ब्लॉक में शामिल किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। भाजपा की तीन सदस्यीय जांच टीम ने गुरुवार को स्थल निरीक्षण किया तो वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भाजपा पर इस गैर-राजनीतिक मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। सिंह देव ने कहा है कि 2022 में जब केते एक्सटेंशन परियोजना के विरुद्ध छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया था तब शिवरतन शर्मा बतौर विधायक छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य थे। तब केते एक्सटेंशन प्रोजेक्ट को निरस्त करने के संकल्प पर हस्ताक्षर करने वाले भाजपा अध्ययन दल के संयोजक शिवरतन शर्मा आज किसके प्रभाव में इस खदान की वकालत कर रहे हैं।

पूर्व उप मुख्यमंत्री सिंहदेव ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने स्वयं इस विषय को पूरी तरह गैर-राजनीतिक पहल के तहत आगे बढ़ाया है और भाजपा जांच समिति के सदस्यों से मोबाइल पर बात कर सरगुजा की जनभावनाओं का ध्यान रखने का आग्रह भी किया था। लेकिन समिति ने कलेक्टर से 2020 में मिली अनुमति का हवाला देकर इसे कांग्रेस सरकार और उनके नाम से जोड़ने की कोशिश की। सिंहदेव ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में न तो जंगल काटा गया और न ही नई खदान की मंजूरी दी गई, बल्कि छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंते एक्सटेंशन खदान को निरस्त करने का संकल्प पारित किया था।

उन्होंने कहा कि “2009 में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को ‘नो गो एरिया’ घोषित किया था, लेकिन 2010 में भाजपा की राज्य सरकार के अनुरोध पर एक खदान की अनुमति मिली। अब भाजपा की केंद्र सरकार के समय तीसरी खदान का रास्ता खोला जा रहा है।”
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भाजपा नेता और जांच समिति सदस्य शिवरतन शर्मा को भी कठघरे में खड़ा किया। सिंहदेव ने याद दिलाया कि 2022 में जब विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंते एक्सटेंशन प्रोजेक्ट को निरस्त करने का संकल्प लिया था, तब शर्मा ने भी इस पर हस्ताक्षर किए थे। अब वही खदान के समर्थन में खड़े हैं। सिंहदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गलत सर्वे या भ्रामक जानकारी के आधार पर किसी अधिकारी ने अनुमति दी है तो उन सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।










