Sonam Wangchuk on CJP: सोनम वांगचुक बोले CJP संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा, लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं

सोनम वांगचुक ने CJP संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं का राजनीति में आने या नई पार्टी बनाने की इच्छा रखना गलत नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन को किसी राजनीतिक दल के एजेंडे से अलग और निष्पक्ष रखना जरूरी था।

Sonam Wangchuk on CJP: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरेच जनता पार्टी के संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर अपनी राय सामने रखी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों को नजदीक से देखा और उनके व्यवहार के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले। वांगचुक के अनुसार, उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि कॉकरेच जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोगों की भविष्य में सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा हो सकती है। हालांकि, उन्होंने इसे नकारात्मक नजरिए से देखने से इनकार किया।

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राजनीतिक महत्वाकांक्षा को वांगचुक ने बताया सामान्य

एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी के संस्थापक कोई संत नहीं हैं, जिनसे यह उम्मीद की जाए कि उनका राजनीति से कोई संबंध या रुचि नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थापकों ने उनके सामने सीधे तौर पर राजनीति में जाने की इच्छा व्यक्त नहीं की थी। लेकिन आंदोलन के दौरान उनकी गतिविधियों और व्यवहार को देखकर वांगचुक ने ऐसा अनुमान लगाया। उनका मानना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखना अपने आप में गलत नहीं है।

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युवाओं के राजनीति में आने के समर्थन में वांगचुक

वांगचुक ने बातचीत में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को राजनीति में सक्रिय होना चाहिए। युवा मौजूदा राजनीतिक दलों से जुड़ सकते हैं या जरूरत महसूस होने पर नए राजनीतिक संगठन भी बना सकते हैं। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी पसंद और विचारों के अनुसार राजनीतिक भूमिका चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इसलिए किसी व्यक्ति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को केवल इसी आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता।

छात्र आंदोलन को राजनीति से अलग रखने की सलाह

हालांकि वांगचुक ने छात्र आंदोलन और सक्रिय राजनीति के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने सलाह दी थी कि यदि किसी व्यक्ति की भविष्य में राजनीतिक महत्वाकांक्षा है, तो उसे तत्काल छात्र आंदोलन के मंच से आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उनके मुताबिक आंदोलन की विश्वसनीयता उसके मूल मुद्दों और उद्देश्य पर निर्भर करती है। ऐसे में राजनीतिक हितों को आंदोलन से अलग रखना जरूरी है।

आंदोलन की एकता बनाए रखना जरूरी

सोनम वांगचुक के अनुसार किसी छात्र या सामाजिक आंदोलन में अलग-अलग विचारधारा वाले लोगों की भागीदारी स्वाभाविक है। लेकिन आंदोलन तभी प्रभावी और विश्वसनीय रह सकता है, जब सभी लोग उसके मूल मुद्दों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि किसी आंदोलन का मंच राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने लगे तो उसकी एकता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन के दौरान राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखने की सलाह दी थी।

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अभिजीत दिपके के पुराने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र

वांगचुक ने कॉकरेच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर उठने वाली आलोचनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने उनका ध्यान दिपके के आम आदमी पार्टी से पुराने जुड़ाव की ओर दिलाया था। हालांकि, वांगचुक ने इसे अपने लिए बड़ी चिंता नहीं माना। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति का अतीत में किसी राजनीतिक दल से जुड़ना उसके वर्तमान सामाजिक कार्यों या आंदोलन से जुड़े प्रयासों को स्वतः गलत साबित नहीं करता।

मौजूदा काम के आधार पर मूल्यांकन की बात

वांगचुक ने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करते समय केवल उसके पुराने राजनीतिक संबंधों को देखना पर्याप्त नहीं है। उसके वर्तमान काम, उद्देश्य और भूमिका को भी समझना चाहिए। उनके मुताबिक लोकतंत्र में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के बीच आने-जाने वाले लोगों को केवल उनके अतीत के आधार पर खारिज करना उचित नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को भी अपने विचारों के साथ आगे आने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

आंदोलन और राजनीति के बीच संतुलन पर जोर

सोनम वांगचुक की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सामाजिक आंदोलन एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, लेकिन दोनों की भूमिकाओं को स्पष्ट रखना आवश्यक है। यदि कोई आंदोलन किसी खास मुद्दे को लेकर खड़ा हुआ है, तो उसकी प्राथमिकता वही मुद्दा होना चाहिए। वहीं आंदोलन से जुड़े व्यक्ति भविष्य में राजनीति में जाना चाहते हैं तो यह उनका व्यक्तिगत फैसला हो सकता है।

युवा नेतृत्व को लेकर बढ़ी चर्चा

वांगचुक का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब छात्र आंदोलनों से उभरे नए चेहरों के भविष्य में राजनीति में आने को लेकर चर्चा तेज है। उन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को गलत ठहराने के बजाय युवाओं की भागीदारी का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। इस तरह उनका बयान युवा नेतृत्व, सामाजिक आंदोलनों और राजनीति के बीच संबंधों को लेकर चल रही बहस को नया दृष्टिकोण देता है।

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Chandan Das

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