Sonam Wangchuk FCRA: केंद्र सरकार ने 25 सितंबर 2025 को पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के गैर-सरकारी संगठन (NGO) का FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। आरोप है कि उनकी संस्था ने विदेशी फंडिंग से संबंधित नियमों का बार-बार उल्लंघन किया है। वहीं, वांगचुक ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि “मुझे टारगेट किया गया है क्योंकि मैं सच बोलता हूं।”
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद CBI ने वांगचुक की संस्था के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। जांच में दावा किया गया है कि 2022 से 2024 के बीच वांगचुक की संस्था को विदेशों से फंड मिला, जबकि संस्था के पास FCRA की अनुमति नहीं थी। यह विदेशी फंड संयुक्त राष्ट्र, स्विट्जरलैंड और इटली जैसे देशों के संगठनों से आया था।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने कहा,”हमने FCRA रजिस्ट्रेशन नहीं लिया क्योंकि हमारा विदेशी फंडिंग लेने का कोई इरादा नहीं था। हमें जो राशि मिली वह हमारी टेक्नोलॉजी (जैसे आर्टिफिशियल ग्लेशियर और सोलर हीटेड बिल्डिंग्स) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के एवज में फीस के रूप में मिली थी।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी लेन-देन पारदर्शी थे और संस्थान की अकादमिक और तकनीकी उपलब्धियों का हिस्सा थे।
वांगचुक ने केंद्र सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि लद्दाख में आगामी चुनावों के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा,”मैंने लद्दाख के लोगों के हक के लिए आवाज़ उठाई, और अब मुझे देशद्रोह का नोटिस भेजा गया। डेढ़ महीने पहले ही मुझे बताया गया कि मेरे खिलाफ FIR है। इसके बाद CBI की जांच शुरू कर दी गई।”उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें जेल भेजा जाता है, तो यह कदम युवाओं को सच्चाई के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
इनकम टैक्स नोटिस पर वांगचुक ने कहा कि लद्दाख एक ऐसा क्षेत्र है जहां टैक्स से छूट है, लेकिन “मैं देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए टैक्स भरता हूं। फिर भी मुझे IT विभाग की तरफ से समन आ रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम एक योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है।”
हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा के बाद वांगचुक ने दावा किया कि “सरकार ने सारा दोष मुझ पर डाल दिया, जबकि मेरी भूमिका पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक रही है। यह दिखाता है कि किस तरह सच्चाई बोलने वालों को दबाया जा रहा है।”सोनम वांगचुक के NGO पर FCRA उल्लंघन को लेकर उठी कार्रवाई ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे कानून का पालन मान रही है, तो दूसरी ओर वांगचुक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है, खासकर लद्दाख चुनाव के मद्देनज़र।
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