Solar Power Crisis : दुनिया भर में स्वच्छ और हरित ऊर्जा के स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। सूरज की किरणें हमें असीमित ऊर्जा प्रदान करती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों से निकलने वाला जहरीला धुआं इस ऊर्जा के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक शोध रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोयला संयंत्रों से निकलने वाला प्रदूषण वातावरण में एक ऐसी परत बना रहा है जो सौर पैनलों तक पहुँचने वाली धूप की तीव्रता को कम कर देती है। इसके चलते, दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है।

उत्तर भारत और दिल्ली-NCR पर प्रदूषण की दोहरी मार
इस शोध के मुताबिक, प्रदूषण के कारण सौर ऊर्जा को होने वाला नुकसान भौगोलिक रूप से अलग-अलग है। पूर्वी चीन और उत्तर भारत इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उत्तर भारत में प्रदूषण के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन में औसतन 20 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है, जबकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यह आंकड़ा करीब 17 प्रतिशत तक है। राजधानी के आसपास चल रहे 13 कोयला आधारित पावर प्लांट अब पर्यावरणविदों के निशाने पर हैं। सीएक्यूएम (CAQM) ने पहले ही इनमें से कई प्लांटों पर प्रदूषण मानकों के उल्लंघन के चलते भारी जुर्माना लगाया है। यह रिपोर्ट साबित करती है कि ये प्लांट न केवल हवा को जहरीला बना रहे हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को भी अंधेरे में धकेल रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन में 5.8 फीसदी की गिरावट
प्रदूषण का यह असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक संकट है। वर्ष 2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण के चलते दुनिया भर में सौर ऊर्जा उत्पादन में 5.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह नुकसान लगभग 111 टेरावॉट घंटे (TWh) बिजली के बराबर है। यदि हम इसे कोयला संयंत्रों के नजरिए से देखें, तो यह नुकसान 18 मध्यम आकार के कोयला पावर प्लांटों के वार्षिक उत्पादन के बराबर है। प्रमुख देशों में हुए नुकसान के आंकड़े इस प्रकार हैं: भारत (9.6%), चीन (7.9%), जापान (5.4%), जर्मनी (4.7%), यूएसए (3.1%) और स्पेन (3.1%)।
घर पर सोलर ऊर्जा कैसे अपनाएं?
प्रदूषण के बावजूद, सौर ऊर्जा को अपनाना आज भी पर्यावरण और आपकी जेब दोनों के लिए फायदेमंद है। यदि आप अपने घर पर सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
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बिजली खपत का आकलन: सबसे पहले अपने घर के बिजली बिल के आधार पर यह तय करें कि आपको कितने किलोवाट के सोलर सिस्टम की आवश्यकता है।
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वेंडर का चयन: हमेशा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त या सूचीबद्ध वेंडर से ही सोलर पैनल लगवाएं।
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सरकारी योजना: आर्थिक लाभ के लिए केंद्र सरकार की ‘PM सूर्य घर योजना’ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करें। इससे आपको सरकारी सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।
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सही सिस्टम का चुनाव: अपनी जरूरत के अनुसार ‘ऑन-ग्रिड’ सोलर सिस्टम का चयन करें। यह न केवल आपकी बिजली बिल कम करेगा, बल्कि भविष्य में ग्रिड को अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई का जरिया भी बन सकता है।
सोलर सिस्टम लगवाने से पहले स्थानीय बिजली विभाग से तकनीकी जांच अवश्य करवाएं ताकि इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता बनी रहे और आप प्रदूषण के बीच भी ऊर्जा उत्पादन को अधिकतम कर सकें।
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