Stock Market Crash
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का मंजर देखने को मिला। विदेशी फंडों की निरंतर निकासी और वैश्विक स्तर पर उपजे कमजोर रुझानों के चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 961.42 अंक लुढ़ककर 81,287.19 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई (NSE) का निफ्टी भी 317.90 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 25,178.65 के स्तर पर सिमट गया। बाजार की इस गिरावट ने पिछले कुछ दिनों की बढ़त को पूरी तरह धो दिया है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता का बेनतीजा रहना है। वार्ता में किसी ठोस प्रगति के अभाव ने मध्य-पूर्व में युद्ध और तनाव की आशंका को फिर से गहरा दिया है। इसके अलावा, अमेरिकी तकनीकी शेयरों (Tech Stocks) में बड़े पैमाने पर हुई बिकवाली और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय निवेशकों के हौसले पस्त कर दिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी भविष्य की अनिश्चितताओं ने भी वैश्विक निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से दूर कर सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ने पर मजबूर किया है।
सेंसेक्स के शेयरों में आज सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) सबसे बड़े घाटे में रहे। इनके अलावा ऑटो सेक्टर के दिग्गज जैसे महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति के शेयरों में भी तगड़ी गिरावट देखी गई। हालांकि, बाजार के इस लाल निशान के बीच कुछ आईटी शेयरों ने अपनी साख बचाने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इंफोसिस और ट्रेंट जैसे शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन यह सेंसेक्स को डूबने से बचाने के लिए काफी नहीं था। कारोबार के अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि सूचकांक अपने दिन के निचले स्तरों के करीब बंद हुए।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वैश्विक मैक्रो कारक वर्तमान में घरेलू बाजार पर हावी हैं। आय सत्र (Earnings Season) के समाप्त होने की ओर बढ़ने के साथ ही निवेशकों के पास अब घरेलू स्तर पर नए ट्रिगर की कमी है। अमेरिका–ईरान वार्ता का निष्कर्षहीन रहना एक बड़ा झटका है। वहीं, ‘लिवलॉन्ग वेल्थ’ के संस्थापक हरिप्रसाद के. ने बताया कि हालिया तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) की उम्मीद पहले से थी, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने इसे और तेज कर दिया। निवेशकों का भरोसा डगमगाया है और वे अब ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रहे हैं।
बाजार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर कड़ी नजर रखें। जब तक मध्य-पूर्व में तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता आने की संभावना कम है। ऐसे में छोटे निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय गुणवत्तापूर्ण शेयरों में लंबी अवधि के लिए निवेश पर विचार करना चाहिए।
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