Sun Pharma और Cipla के शेयरों में गिरावट, NIFTY PHARMA 2.3% नीचे

Sun Pharma: भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयर शुक्रवार, 26 सितंबर को भारी गिरावट के साथ खुले। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि 1 अक्टूबर 2025 से किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पाद पर 100% टैरिफ लागू किया जाएगा, जब तक कि कंपनी अमेरिका में अपनी फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट न बना रही हो। इस घोषणा के बाद निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.36% टूटकर 21,458.75 के स्तर पर आ गया, जिसमें इंडेक्स के सभी 20 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।

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Sun Pharma और अन्य कंपनियों को भारी नुकसान

सबसे ज्यादा नुकसान Sun Pharma को हुआ, जो लगभग 5% गिर गया। इसके अलावा Gland Pharma, Natco Pharma, Biocon और Laurus Labs भी इस दबाव में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर सीमित रहेगा क्योंकि अधिकांश भारतीय फर्म अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाएं निर्यात करती हैं, जो इस टैरिफ से मुक्त रह सकती हैं। हालांकि, Sun Pharma जैसी विशेष दवाओं में काम करने वाली कंपनियों को इस फैसले का अधिक असर देखने को मिल सकता है।

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ट्रंप के टैरिफ का मकसद और शर्तें

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे कंपनियां जो अमेरिका में “निर्माण कार्य शुरू कर चुकी हैं” या जिनका प्लांट “निर्माणाधीन” है, वे इस टैरिफ से छूट पाएंगी। यह नीति अमेरिकी फार्मा निर्माण को देश में बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। हालांकि, इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

भारत-अमेरिका के फार्मा संबंध और भारत की भूमिका

Observer Research Foundation (ORF) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा फार्मास्यूटिकल मार्केट है, जिसने 2024 में लगभग 212.67 अरब डॉलर के दवाओं का आयात किया। अमेरिकी बाजार में लगभग 90% प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के लिए होते हैं, जो केवल 20% खर्च का हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि ज्यादातर खर्च पेटेंट वाली दवाओं पर होता है।

भारत अमेरिका को 47% जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराता है, जो अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर, भारतीय जेनेरिक दवा ‘रोसुवास्टैटिन’ के बाजार में आने के बाद अमेरिका में इसे खरीदने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई।

टैरिफ के संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ 10-15% से अधिक हो गया तो भारतीय निर्माता अमेरिकी बाजार छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं क्योंकि उनकी मुनाफाखोरी बहुत कम होती है। इससे दवा की गुणवत्ता पर असर पड़ने का खतरा भी रहता है। इस कदम से अमेरिका में दवाओं की कमी हो सकती है और दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो अमेरिकी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती साबित होगी।

भारतीय फार्मा निर्यात में अमेरिका का योगदान

फार्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा फार्मा निर्यात बाजार है और भारत के कुल फार्मा निर्यात का 31.35% हिस्सा अमेरिका को जाता है। इसमें जेनेरिक दवाओं का वर्चस्व है, जो अमेरिका की लगभग 47% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति भारत से होती है।

भारत पर अमेरिका द्वारा कोई टैरिफ नहीं लगता, जबकि भारत अमेरिका से आने वाले फार्मा उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाता है। ट्रंप की यह घोषणा भारत-अमेरिका के फार्मा व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है।ट्रंप के 100% टैरिफ के फैसले से भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी, खासकर उन कंपनियों के लिए जो पेटेंटेड दवाओं में काम करती हैं। यह कदम वैश्विक दवा सप्लाई चेन और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी प्रभावी साबित हो सकता है। भारतीय फार्मा उद्योग को अब नई रणनीतियों पर काम करने की आवश्यकता है ताकि वे इस बदलाव का सामना कर सकें।

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