Manmohan Singh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 13वें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के जन्मदिन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके लंबी सार्वजनिक सेवा के दौरान देश के लिए दिए गए योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर (पूर्व में X) हैंडल पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि। हम उनके देश के लिए किए गए योगदान को याद करते हैं।”

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को गाह (अब पाकिस्तान में) हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री थे जिन्होंने 1982 से 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर के रूप में भी सेवा की। वे 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री रहे और उस दौरान भारत ने आर्थिक सुधारों की दिशा में बड़े कदम उठाए, जिसने देश की आर्थिक नीति में क्रांतिकारी बदलाव किए।

आर्थिक सुधारों के सूत्रधार
1991 में भारत के वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण की नींव रखी, जो देश को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक साबित हुई। उन्होंने संसद में अपने पहले भाषण में फ्रांसीसी लेखक विक्टर ह्यूगो के शब्द उद्धृत किए, “कोई ताकत इस धरती पर उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया हो।”
उनके नेतृत्व में भारत ने बाज़ार को खुला किया, सरकारी नियंत्रण को कम किया और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। ये सुधार भारत के आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित हुए।
प्रधानमंत्री के रूप में उपलब्धियां
डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके शासनकाल में देश ने आर्थिक वृद्धि, सामाजिक विकास और वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण प्रगति की। उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू हुईं, जैसे:
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राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA), जो बाद में MGNREGA बना,
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सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005,
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ऐतिहासिक भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौता, जिसने भारत की परमाणु अलगाव को समाप्त किया।
चुनौतियां और आलोचनाएं
हालांकि मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल (2009-2014) में कई चुनौतियां आईं। महंगाई की बढ़ोतरी, नीति में सुस्ती और भ्रष्टाचार के आरोप जैसे टेलीकॉम लाइसेंसिंग घोटाले ने उनके प्रशासन की छवि को प्रभावित किया। इसके बावजूद, उनका नेतृत्व शांत, बुद्धिमान और नैतिकता से परिपूर्ण माना जाता है।
उनके योगदान को याद क्यों किया जाना चाहिए?
डॉ. मनमोहन सिंह की आर्थिक दूरदर्शिता और नीति निर्धारण ने भारत को एक नई दिशा दी। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान उन्होंने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी नीतियां आज भी भारत की आर्थिक प्रगति के लिए मार्गदर्शक हैं।
उनकी शांति और धैर्य से भरी छवि, सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और देश के लिए उनके योगदान को हम सभी को याद रखना चाहिए। उनका नाम भारत के आर्थिक और सामाजिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।डॉ. मनमोहन सिंह न केवल एक महान अर्थशास्त्री और प्रशासक थे, बल्कि वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नया स्थान दिलाया। उनके योगदान को याद कर हम देश के विकास पथ को और मजबूत बना सकते हैं।
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