SIR case Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में चल रही बिहार की मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई में जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग से नागरिकता प्रमाण और वोटर कार्ड की वैधता को लेकर सख्त सवाल किए हैं। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए क्योंकि यह एक वैध पहचान और निवास प्रमाण है।

क्या SIR के तहत वोटर कार्ड रद्द होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से लोगों के वोटर कार्ड रद्द किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि वोटर कार्ड को केवल जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 के तहत ही रद्द किया जा सकता है और अभी तक किसी का भी वोटर कार्ड रद्द नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फिलहाल नई वोटर सूची बनाने की प्रक्रिया चल रही है और पुरानी सूची बनी हुई है। जिसका मतलब यह है कि जिनके नाम पुरानी वोटर लिस्ट में थे, वे अभी भी वैध मतदाता हैं।

65 लाख मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि जिन 65 लाख मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, उनका नाम और कटौती का कारण जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके अलावा इस बारे में प्रमुख समाचार पत्र, टीवी और रेडियो के माध्यम से भी व्यापक सूचना दी जाएगी ताकि सभी लोगों को पता चले कि उनका नाम क्यों हटाया गया है।
आधार कार्ड को पहचान के तौर पर मान्यता देने की अपील
जस्टिस बागची ने कहा कि आधार कार्ड देश में पहचान और निवास का एक मजबूत दस्तावेज है, इसलिए इसे वोटर पहचान पत्र के विकल्प के रूप में स्वीकार करना चाहिए। इससे मतदाता पहचान और सूची की विश्वसनीयता में सुधार होगा।
अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह 22 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक मतदाता सूची से जुड़े सभी विवादों और शिकायतों का समाधान करे। अगली सुनवाई दोपहर 2 बजे होगी।
बिहार की मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर निगरानी तेज कर दी है। कोर्ट ने आधार कार्ड को मतदाता पहचान के लिए मान्यता देने पर जोर दिया है और 65 लाख मतदाताओं की कटौती की वजह जनता के सामने स्पष्ट करने को कहा है। चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह पूरी पारदर्शिता और संवैधानिक दायरे में रहकर मतदाता सूची का नवीनीकरण करे। यह मामला भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सही और सटीक मतदाता सूची का होना निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।











