Bhupesh Baghel : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यप्रणाली और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 44 को असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अब इस याचिका पर 11 अगस्त को सुनवाई होगी। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बघेल की ओर से पक्ष रखा।

पहले होगी प्रारंभिक आपत्तियों पर बहस, फिर मेरिट्स पर सुनवाई
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भूइयां और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने साफ किया कि पहले वे प्रारंभिक आपत्तियों (Preliminary Objections) पर बहस सुनेंगे, फिर उसका जवाब और अंत में मामले के गुण-दोष (Merits) पर सुनवाई की जाएगी। सिब्बल ने इस पर आपत्ति जताई कि मामला सिर्फ दो दिन का तय था, ऐसे में देरी से केस लंबा खिंच सकता है।

धारा 44 और 50 पर बघेल ने उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने PMLA की धारा 44 को चुनौती देते हुए कहा कि एक बार जब किसी केस में चार्जशीट दाखिल हो जाती है, तो दोबारा जांच शुरू करने के लिए कोर्ट की अनुमति लेना आवश्यक होता है। लेकिन, ED बिना किसी न्यायालयीय अनुमति के दोबारा जांच कर रही है, जो न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन है।
इसके अलावा, उन्होंने धारा 50 पर भी आपत्ति जताई, जिसके तहत आरोपी व्यक्ति से ही गवाही ली जाती है। बघेल ने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति अपने खिलाफ कैसे गवाही दे सकता है? यह संविधान और न्याय की बुनियादी अवधारणाओं के खिलाफ है।
राजनीतिक हमला: डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर साधा निशाना
बघेल ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि “वह अब ED के प्रवक्ता बन गए हैं।” उन्होंने कहा कि यदि किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो रही है, तो संविधान के तहत उसे बचाव का अधिकार भी मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में ईडी की मंशा और कार्यशैली संदेह के घेरे में है।

‘मेरे बेटे को गिरफ्तार, पर NBW वाले खुले घूम रहे’
मीडिया से बातचीत में बघेल ने कहा, “जिसके खिलाफ नॉन बेलेबल वॉरंट (NBW) जारी है, वो खुलेआम घूम रहा है। लेकिन मेरे बेटे को बिना ठोस वजह गिरफ्तार कर लिया गया।” उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का उपयोग विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।
अब अगली सुनवाई 11 अगस्त को
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि 11 अगस्त (सोमवार) को इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई होगी। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पहले कुछ बेल मामलों की सुनवाई के बाद सुबह 11 बजे PMLA की समीक्षा याचिका पर बहस शुरू की जाएगी, ताकि पूरे मामले को पर्याप्त समय मिल सके।
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