Surajpur Elephant Attack : सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम सिंगरा में बुधवार शाम जंगली हाथी के हमले में 52 वर्षीय किसान रामलाल की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किसान खाद लेकर बाइक से अपने घर लौट रहा था। उसके साथ एक अन्य व्यक्ति भी बाइक पर मौजूद था। सिंगरा जंगल के पास अचानक हाथी ने दोनों पर हमला कर दिया। साथी ने किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचा ली, लेकिन किसान हाथी की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
खाद लेकर घर लौटते समय रास्ते में हुआ हमला
जानकारी के मुताबिक सिंगरा गांव निवासी रामलाल बुधवार दोपहर खाद खरीदने के लिए प्रतापपुर गया था। खाद लेने के बाद वह शाम के समय अपने साथी के साथ बाइक से वापस गांव लौट रहा था। दोनों जैसे ही जंगल क्षेत्र के पास पहुंचे, वहां मौजूद हाथी ने अचानक उनका पीछा करते हुए हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से दोनों घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। हालांकि, रामलाल हाथी से बच नहीं सका।
साथी ने भागकर बचाई अपनी जान
हाथी के हमले के दौरान रामलाल के साथ मौजूद व्यक्ति ने किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाई। वह गांव पहुंचा और ग्रामीणों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद घटना की सूचना वन विभाग को भी दी गई। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक किसान की मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों और परिजनों में घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
ग्रामीणों ने शव उठाने से वन विभाग को रोका
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने शव को वहां से हटाने नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि इलाके में हाथियों की मौजूदगी और उनके विचरण की जानकारी समय रहते लोगों को नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि समय पर ग्रामीणों को अलर्ट किया जाता तो किसान को जंगल वाले रास्ते से जाने से रोका जा सकता था और संभवत: उसकी जान बच सकती थी।
पोड़ी मोड़ चौक पर शव रखकर किया चक्काजाम
गुरुवार सुबह मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण शव लेकर घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर दूर पोड़ी मोड़ चौक पहुंचे। यहां उन्होंने सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथी समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाने की मांग की।
परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग
ग्रामीणों और मृतक के परिजनों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। उन्होंने किसान के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इसके अलावा हाथियों के लगातार बढ़ते हमलों से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि केवल घटना के बाद राहत देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
वन अधिकारी और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा
चक्काजाम की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। प्रशासन की टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने और ग्रामीणों की मांगों पर चर्चा करने की कोशिश की। हालांकि, लगातार हो रही हाथी घटनाओं के कारण ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
हाथियों से सुरक्षा के स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है और इससे जान-माल का खतरा बना हुआ है। उनका आरोप है कि वन विभाग की ओर से समय पर हाथियों की लोकेशन और संभावित खतरे की जानकारी नहीं दी जाती। ग्रामीणों ने मांग की कि हाथियों की निगरानी, समय पर अलर्ट और प्रभावित गांवों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत जारी है।
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