Kudargarh Tragedy
Kudargarh Tragedy: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध मां बागेश्वरी देवी की पावन नगरी कुदरगढ़ धाम से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। यहाँ दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु की अचानक तबीयत बिगड़ने और फिर मृत्यु होने से हड़कंप मच गया है। भीषण गर्मी के प्रकोप और मंदिर तक पहुँचने की कठिन चढ़ाई ने एक हँसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। यह घटना न केवल प्रशासन के इंतजामों पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि आने वाले समय में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है।
मृतक श्रद्धालु की पहचान कोरिया जिले के निवासी फूल सिंह के रूप में हुई है। वे अपनी धार्मिक आस्था के चलते सपरिवार मां बागेश्वरी देवी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने कुदरगढ़ पहुंचे थे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि यात्रा की शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। फूल सिंह उत्साह के साथ मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह तीर्थ यात्रा उनके जीवन की अंतिम यात्रा साबित होगी।
कुदरगढ़ मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 800 से 900 खड़ी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फूल सिंह लगभग चढ़ाई पूरी कर चुके थे। मंदिर के करीब पहुँचकर वे एक स्थान पर रुक गए ताकि पीछे रह गए अपने परिजनों का इंतजार कर सकें। इसी दौरान अचानक उन्हें बेचैनी महसूस हुई और वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। वहां मौजूद पंडा, स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन फूल सिंह की सांसें मौके पर ही थम चुकी थीं।
श्रद्धालु की मौत की खबर जैसे ही मंदिर परिसर में फैली, दर्शनार्थियों के बीच सन्नाटा पसर गया। लोग दहशत और दुख में डूब गए। सूचना मिलते ही कुदरगढ़ चौकी पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सूरजपुर के एसडीओपी अभिषेक पैकरा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला भीषण गर्मी और अत्यधिक शारीरिक श्रम के कारण आए हार्ट अटैक का लग रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
कुदरगढ़ धाम में सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। चिंता की बात यह है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर इस पवित्र स्थल पर यह दूसरी मौत है। इससे पहले एक 19 वर्षीय युवक की भी गिर जाने से जान चली गई थी। बार-बार हो रहे इन हादसों के बावजूद मंदिर परिसर में न तो कोई स्थाई एंबुलेंस तैनात है और न ही प्राथमिक उपचार के लिए कोई पुख्ता चिकित्सा केंद्र। आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को केवल भगवान भरोसे ही रहना पड़ता है।
इस हादसे ने एक बार फिर कुदरगढ़ धाम में रोपवे (Ropeway) निर्माण की पुरानी मांग को हवा दे दी है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए खड़ी सीढ़ियां चढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। सालों से रोपवे की घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ नजर नहीं आया है। आज के आधुनिक युग में भी श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर दर्शन करने पड़ रहे हैं। यदि समय रहते रोपवे और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं, तो शायद फूल सिंह जैसे श्रद्धालुओं की जान बचाई जा सकती थी। अब जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की है कि वे कागजी योजनाओं से बाहर निकलकर ठोस कदम उठाएं।
Read more : Sabarimala Row: सुप्रीम कोर्ट ने वकील को दी नसीहत, कहा- “अदालत में केवल कानूनी दलीलों के लिए जगह है”
PBKS vs RR: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के रोमांचक मुकाबले में मंगलवार को राजस्थान…
West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरणों को शांतिपूर्ण ढंग…
Digital Asset Law: आज के दौर में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, लिंक्डइन और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म…
Keonjhar Bank Incident Odisha : ओडिशा के क्योंझर जिले से आई एक दिल दहला देने…
Modi in Varanasi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे के दौरान…
UAE Leaves OPEC 2026 : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव…
This website uses cookies.