Surajpur News
Surajpur News: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद संवेदनहीन और हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के एक सरकारी स्कूल में मासूम बच्चों से नाले के गंदे पानी में मिड-डे-मील के बर्तन धुलवाए गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे बच्चे दोपहर के भोजन के भारी-भरकम बर्तनों को नाले के पास ले जाकर साफ कर रहे हैं और फिर उन्हें वापस स्कूल की ओर ले जा रहे हैं।
यह शर्मनाक वाकया देवीपुर के अंबेडकर पारा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला का है। घटना 12 मार्च की बताई जा रही है, जब कुछ ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल के पास बह रहे दूषित नाले में बर्तन मांजते देखा। ग्रामीणों ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बना लिया और उसे इंटरनेट पर साझा कर दिया। जैसे ही यह वीडियो जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय मिश्रा के संज्ञान में आया, उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के कड़े आदेश जारी कर दिए। प्रारंभिक जांच में यह बात सच पाई गई कि बच्चों को जानबूझकर गंदे पानी में बर्तन धोने के लिए भेजा गया था।
सूरजपुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) हरेंद्र सिंह द्वारा की गई विस्तृत जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दरअसल, पूरे छत्तीसगढ़ में इन दिनों रसोइया संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इस हड़ताल के कारण स्कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने और सफाई की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर आ गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में खाना बनाने के बाद बर्तनों को साफ करने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इसी का हवाला देते हुए हेडमास्टर और अन्य शिक्षकों ने मासूम बच्चों को ही नाले पर बर्तन साफ करने का आदेश दे दिया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीईओ अजय मिश्रा ने स्कूल की हेडमास्टर मारिया गोरेती को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके अलावा, मामले में भारी लापरवाही बरतने के आरोप में संकुल प्राचार्य संतोष मरकाम, संकुल समन्वयक सुशील कुमार ठाकुर और संकुल केंद्र लांची को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। स्कूल की दो सहायक शिक्षिकाओं, प्रेमलता पांडेय और जितेश्वरी को भी नोटिस थमाया गया है और दंड स्वरूप उनकी एक-एक वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) रोकने के आदेश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि सिस्टम की खामियों का खामियाजा किस तरह मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है। रसोइया हड़ताल के कारण शिक्षकों पर काम का दबाव जरूर था, लेकिन बच्चों को दूषित पानी के पास भेजना न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक था, बल्कि यह उनकी सुरक्षा की भी घोर अनदेखी थी। फिलहाल, शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि रसोइया हड़ताल के दौरान बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम न कराया जाए और भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था अत्यंत सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से सुनिश्चित की जाए।
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