Non-arrest case : नन गिरफ्तारी मामला: आज NIA कोर्ट में बेल पर फैसला, पीड़िता का आरोप-पीट-पीटकर बयान बदलवाया

Non-arrest case :  दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा गिरफ्तार की गईं दो कैथोलिक ननों, प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, के खिलाफ मानव तस्करी का आरोप लगाया गया है। दोनों नन पिछले 9 दिनों से दुर्ग जेल में बंद हैं। इस मामले में आज, 2 अगस्त को बिलासपुर NIA कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुनाया जाएगा। उनके वकील का कहना है कि पुलिस के पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं हैं, और ननों को जल्द बेल मिल सकती है।

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केंद्र और राज्य में मामला गरमाया

ननों की गिरफ्तारी को लेकर राज्यसभा और लोकसभा में मामला उठाया गया है, जबकि कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। केरल के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल में ननों से मिलने के लिए पहुंचा, और उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें एक फर्जी केस में फंसाया गया है। इस बीच, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने भी मामले को लेकर सरकार से अपील की है कि ननों पर लगे आरोपों को रद्द किया जाए।

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पीड़िता का बयान: मारपीट कर बयान बदलवाया गया

विरोध और प्रदर्शन के बीच, इस मामले में शामिल तीन युवतियों में से एक युवती ने मीडिया के सामने आकर अपना बयान दिया। उसने कहा कि ननों ने उसके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया था, बल्कि दुर्ग में उनसे मारपीट की गई और जबरन बयान बदलवाया गया। युवती के इस बयान ने मामले को और भी विवादित बना दिया है, क्योंकि पहले आरोप यह था कि ननों ने उसे और अन्य युवतियों को तस्करी के लिए इस्तेमाल किया था।

NIA कोर्ट में सुनवाई और जमानत पर फैसला

इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को बिलासपुर NIA कोर्ट में हुई, जिसमें पीड़ित पक्ष ने अपनी दलीलें पेश कीं। NIA कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद मामले का निर्णय सुरक्षित रख लिया था। आज, 2 अगस्त को कोर्ट जमानत के मामले पर फैसला सुनाएगा। अदालत ने इस केस को गहराई से सुना और दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया।

मानव तस्करी के तहत आरोप और सजा की संभावना

मानव तस्करी एक गंभीर संगठित अपराध है, जिसमें लोगों को धोखे या बलात्कार के द्वारा उनके घर या देश से दूर ले जाकर उनका शोषण किया जाता है। इसमें जबरन मजदूरी, यौन शोषण, अंग व्यापार और शादी के लिए तस्करी जैसे अपराध शामिल होते हैं। इस मामले में, ननों के खिलाफ आरोप “नॉन-बेलेबल” हैं, यानी गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने की संभावना कम होती है। ऐसे मामलों में अदालत 10 साल की सजा, आजीवन कारावास और भारी जुर्माना भी लगा सकती है।

जमानत और भविष्य में क्या हो सकता है?

अब यह देखने वाली बात होगी कि NIA कोर्ट आज जमानत की याचिका पर क्या फैसला देती है। यदि जमानत मिलती है, तो ननों को दुर्ग जेल से रिहा किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले के राजनीतिक और सामाजिक पहलू इसे और जटिल बना रहे हैं, और आगामी फैसले से राज्य में और देशभर में उथल-पुथल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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