Surguja Naib Tehsildar Assault : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सत्ता और प्रशासन के बीच सीधे टकराव की एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है. जिले के राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर दफ्तर के भीतर घुसकर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस घटना के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. अधिकारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सत्ताधारी दल के विधायक और उनके करीबियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने आपबीती बताते हुए कहा कि सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के समर्थकों ने उप तहसील कार्यालय के भीतर उनके साथ न केवल मारपीट की बल्कि धक्का-मुक्की भी की, सरेआम उनके कपड़े तक फाड़ दिए. वहीं दूसरी ओर, विधायक पक्ष का आरोप है कि नायब तहसीलदार पिछले कई दिनों से एक जरूरी काम को लेकर जानबूझकर टालमटोल कर रहे थे. बुधवार को जब महिला दोबारा दफ्तर पहुंची, तो अधिकारी ने आपा खो दिया और विधायक की चचेरी बहन की फाइल को टेबल से नीचे फेंक दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने महिला को डांटकर ऑफिस से बाहर निकाल दिया. इसी बात की खबर जब समर्थकों को लगी, तो वे उग्र हो गए और विवाद हिंसक रूप में बदल गया.
इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद की शुरुआत दरअसल मैनपाट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली राजापुर उप तहसील से हुई. जानकारी के मुताबिक, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी ने अपनी जमीन का ‘शाख शोध पत्र’ बनवाने के लिए बीते 14 मई को उप तहसील कार्यालय में एक आवेदन और संबंधित फाइल जमा की थी. सीमा धनकी का आरोप है कि नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी और वहां पदस्थ बाबू सामान्य से काम के लिए उन्हें कई दिनों से लगातार दफ्तर के चक्कर कटवा रहे थे. इसी सिलसिले में बुधवार (27 मई) को भी वह आस लगाए उप तहसील कार्यालय पहुंची थीं, जहां उनका अधिकारी से आमना-सामना हुआ.
विधायक की बहन सीमा धनकी ने प्रशासनिक अधिकारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए थाने में दर्ज कराई अपनी शिकायत में कहा कि जब उन्होंने नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी से फाइल पर जल्द हस्ताक्षर करने का विनम्र अनुरोध किया, तो वे अचानक बुरी तरह भड़क गए. आरोप के मुताबिक, अधिकारी ने चिल्लाते हुए कहा, “तुम होती कौन हो मुझे हस्ताक्षर करने के लिए कहने वाली? बहुत ज्यादा जल्दी है तो जाकर सीधे मैनपाट में साइन करा लो.”
सीमा का दावा है कि इसके तुरंत बाद नायब तहसीलदार ने मातहतों को आदेश देकर उन्हें अपमानित करते हुए तहसील परिसर से बाहर करवा दिया. इस कड़े बर्ताव से आहत होकर सीमा ने तुरंत पूरी घटना की जानकारी फोन पर अपने भाई और विधायक रामकुमार टोप्पो को दी, जिसके बाद विधायक के नाराज समर्थक भारी संख्या में उप तहसील कार्यालय पहुंचने लगे.
घटनाक्रम के अनुसार, विवाद की सूचना मिलने के बाद शाम करीब 6 बजे विधायक रामकुमार टोप्पो ने सीतापुर लौट चुके नायब तहसीलदार को फोन करके वापस राजापुर दफ्तर बुलाया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) फागेश सिन्हा भी खुद राजापुर पहुंचे. वहां पहुंचते ही विधायक ने अपनी बहन के साथ हुए अभद्र व्यवहार को लेकर अधिकारी से कड़े सवाल किए.
जवाब में तुषार मानिकपुरी ने कहा कि उन्होंने कोई अभद्रता नहीं की है, बल्कि महिला तुरंत हस्ताक्षर करने का दबाव बना रही थीं, इसलिए उन्हें अगले दिन आने को कहा गया था. नायब तहसीलदार का आरोप है कि इतना बोलते ही विधायक के इशारे पर समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया और खुद विधायक ने उन्हें एक किनारे ले जाकर उनके साथ मारपीट की. इस दौरान एसडीएम फागेश सिन्हा ने तुरंत बीच-बचाव किया और किसी तरह अधिकारी को सुरक्षित बचाकर अपनी गाड़ी में बैठाया और अंबिकापुर के लिए रवाना हो गए.
इस पूरे हिंसक मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों ही पक्षों की शिकायतों के आधार पर कड़ा रुख अपनाते हुए काउंटर एफआईआर (क्रॉस केस) दर्ज कर ली है. नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की लिखित शिकायत पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज और मारपीट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इसमें भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो, उनके सहयोगी यूसुफ, नाजिम राजा और पंकज गुप्ता सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 221(1), 132 और 191(2) के तहत नामजद केस दर्ज किया गया है. वहीं, दूसरी ओर विधायक की बहन सीमा धनकी की शिकायत पर पुलिस ने नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के खिलाफ भी दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
इस संवेदनशील घटना के बाद प्रशासनिक अमले में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी और चश्मदीद एसडीएम फागेश सिन्हा को अपने कार्यालय तलब किया और पूरे घटनाक्रम की कूटनीतिक जानकारी ली. कलेक्टर अजीत बसंत ने मीडिया को बताया कि प्रथम दृष्टया अधिकारी के साथ मारपीट की बात सामने आई है. कलेक्टर से मुलाकात करने और प्रशासनिक समर्थन मिलने के बाद नायब तहसीलदार, एसडीएम और जिले के अन्य तमाम राजस्व अधिकारी एकजुट होकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर अंबिकापुर कोतवाली थाने पहुंचे और अपनी एकजुटता प्रदर्शित की.
इस बीच, क्षेत्र के कद्दावर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने इस पूरी घटना पर राज्य सरकार और विधायक को आड़े हाथों लेते हुए बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस पूरी वारदात को ‘सरासर अन्याय’ और ‘प्रशासनिक ढुलमुल रवैये’ का सीधा नतीजा बताया है. अमरजीत भगत ने तंज कसते हुए कहा, “जनता द्वारा जनप्रतिनिधि चुने जाने का मतलब यह कतई नहीं होता कि आप सत्ता के नशे में चूर होकर कहीं भी ‘सिंघम स्टाइल’ में अधिकारियों के साथ मारपीट और गुंडागर्दी शुरू कर देंगे. यदि कोई सरकारी अधिकारी काम नहीं कर रहा है या लापरवाही बरत रहा है, तो कानून के दायरे में रहकर उसका ट्रांसफर या सस्पेंशन कराया जाना चाहिए, न कि कानून को अपने हाथ में लिया जाए.”
अमरजीत भगत ने सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों में सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा कानून हाथ में लेने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में यह ऐसी तीसरी या चौथी वारदात है. उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन शुरुआती छोटी घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामलों को आपसी समझौते से दबाने और रफा-दफा करने में लगा रहा, जिससे अपराधियों और गुंडों के हौसले बुलंद हो गए. इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी निष्पक्ष और तटस्थ रहकर काम करने की कूटनीतिक सलाह दी.
पूर्व मंत्री ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि “अधिकारियों की ज्यादा स्वामी-भक्ति के चक्कर में ही” अक्सर ऐसी अप्रिय स्थितियां निर्मित होती हैं. अधिकारियों को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए; यदि वे आज मार खाएंगे और बाद में राजनीतिक दबाव में बयान बदलकर समझौता कर लेंगे, तो समाज और अपराधियों के बीच उनकी छवि हमेशा ऐसी ही कमजोर बनी रहेगी.
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