Surguja RHO Suspended
Surguja RHO Suspended : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सरकारी सेवा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक रूरल हेल्थ ऑफिसर (RHO) को प्राइवेट वेलनेस कंपनी का खुलेआम प्रचार-प्रसार करना भारी पड़ गया। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (JD Health) डॉ. अनिल शुक्ला ने नियमों का उल्लंघन करने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप में आरएचओ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है।
दरअसल, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब लुंड्रा ब्लॉक के सखौली अस्पताल में पदस्थ आरएचओ सोयाबर सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा। वायरल वीडियो में सरकारी अधिकारी होने के बावजूद सोयाबर सिंह एक निजी वेलनेस कंपनी के एजेंडे का जोर-शोर से प्रचार करते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जेडी (हेल्थ) डॉ. अनिल शुक्ला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच करने के आदेश जारी किए थे।
विभागीय जांच में यह बात पूरी तरह साबित हो गई कि आरएचओ सोयाबर सिंह और उनकी पत्नी दोनों मिलकर उस निजी वेलनेस कंपनी के लिए काम कर रहे थे। लखनपुर में कंपनी द्वारा आयोजित एक बड़े मार्केटिंग और बिजनेस प्रोग्राम में दोनों शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय सरकारी कर्मचारियों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मियों को बुलाया गया था। मंच से लोगों को संबोधित करते हुए आरएचओ सोयाबर सिंह ने कहा था कि सरकारी नौकरी में रहते हुए कभी भी विदेशों जैसा बड़ा पैकेज और ऐशो-आराम नहीं मिल सकता, इसके लिए लोगों को इस प्राइवेट वेलनेस कंपनी से जुड़ना ही होगा।
हद तो तब हो गई जब आरएचओ सोयाबर सिंह और उनकी नर्स पत्नी प्रियंका सिंह ने मंच पर ‘बैलेंस कोच’ के रूप में मार्केटिंग शुरू कर दी। वे कंपनी के अलग-अलग प्रोडक्ट्स के फायदे गिनाकर वहां मौजूद लोगों को भी बैलेंस कोच बनने के लिए उकसा रहे थे। इतना ही नहीं, सोयाबर सिंह ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य विभाग का मजाक उड़ाते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान दिन-रात जान जोखिम में डालकर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को सरकार से एक फूल तक नसीब नहीं हुआ, जबकि इस कंपनी का बैलेंस कोच बनने के बाद लाखों रुपये का सालाना पैकेज और शानदार विदेशी दौरों का मौका मिलता है।
इस पूरे प्रोपेगैंडा वीडियो में एक और गंभीर लापरवाही सामने आई कि पति-पत्नी ने कंपनी के प्रचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक लोगो (Logo) का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रोजेक्टर पर वीडियो चलाकर पिछले महीने कंपनी के माध्यम से की गई अपनी निजी कमाई को भी सार्वजनिक रूप से दिखाया, जो एक लाख रुपए से अधिक की थी। सरकारी पद पर रहते हुए किसी निजी व्यावसायिक गतिविधि से लाभ कमाना और उसका इस तरह प्रदर्शन करना सेवा नियमों के खिलाफ माना गया।
सीएमएचओ की विस्तृत जांच रिपोर्ट में जब आरएचओ सोयाबर सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह (जो कि खुद स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स हैं) द्वारा निजी वेलनेस कंपनी का प्रचार करने की पुष्टि हो गई, तब जेडी हेल्थ ने कड़ा एक्शन लिया। संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल शुक्ला ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आरएचओ स्वयंवर सिंह को शासकीय सेवा से निलंबित कर दिया है। वहीं, उनकी पत्नी और स्टाफ नर्स प्रियंका सिंह को भी इस कृत्य में बराबर का भागीदार पाते हुए विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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