Nepal Protest : नेपाल में चल रहे Gen-Z आंदोलन और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अब राजनीतिक स्थिरता की दिशा में पहला बड़ा कदम उठता नजर आ रहा है। नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में तेजी से सामने आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में सुशीला कार्की ने खुद भी इस जिम्मेदारी को संभालने की इच्छा जताई है, खासकर तब जब उन्हें देश की युवा पीढ़ी का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने बुधवार को एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा: “Gen-Z मुझे पसंद करता है, इसलिए मैं जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। देश को एक स्थिर और पारदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, और अगर युवा मुझे नेतृत्व सौंपना चाहते हैं, तो मैं तैयार हूं।” उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।
काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन शाह, जो स्वयं भी Gen-Z का चेहरा माने जाते हैं, ने भी सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता का उदाहरण हो, और सुशीला कार्की इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती हैं।
नेपाल में Gen-Z आंदोलनकारियों द्वारा बुलाई गई वर्चुअल जनसभा में 5000 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इस वर्चुअल बैठक में सबसे अधिक समर्थन सुशीला कार्की को मिला। यह साफ संकेत है कि नेपाल की नई राजनीति अब युवाओं के हाथों में आकार ले रही है, और वे पुराने नेताओं की जगह नए और भरोसेमंद चेहरों को मौका देना चाहते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया। वे केवल 1 साल 2 महीने ही पीएम पद पर रह सके। उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध, भाई-भतीजावाद और युवाओं की अनदेखी जैसे मुद्दों पर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता गया। संसद भवन और नेताओं के आवासों पर हिंसक हमलों के बाद देश में अराजकता की स्थिति बन गई थी। पुलिस फायरिंग में कई युवाओं की मौत ने हालात और बिगाड़ दिए, जिसके बाद गृह मंत्री और कृषि मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया।
अब जबकि सुशीला कार्की ने खुद आगे आकर नेतृत्व की इच्छा जताई है, और उन्हें युवाओं तथा स्थानीय नेताओं का समर्थन भी मिल रहा है, तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि नेपाल की अंतरिम सरकार जल्द ही उनके नेतृत्व में गठित हो सकती है।
नेपाल में मौजूदा संकट के बीच सुशीला कार्की का सामने आना एक आशा की किरण की तरह देखा जा रहा है। Gen-Z के आंदोलन ने न केवल एक भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका है, बल्कि भविष्य के लिए एक नया नेतृत्व भी सामने ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है, और क्या सुशीला कार्की युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतर पाएंगी।
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