Sushmita Dev Resignation : TMC सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे की चर्चा तेज, हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें

Sushmita Dev Resignation :  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट अब पूरी तरह गहरा गया है. बुधवार को टीएमसी को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने टीएमसी और उच्च सदन (राज्यसभा) से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इस बड़े राजनीतिक कदम के तुरंत बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम सकती हैं.

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गौरतलब है कि सुखेंदु शेखर राय के बाद, महज एक हफ्ते के भीतर संसद के उच्च सदन से इस्तीफा देने वाली सुष्मिता देव टीएमसी की दूसरी बड़ी और कद्दावर सांसद हैं. देव आज देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपेंगी.

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काकोली घोष दस्तीदार के ’20 सांसदों’ वाले दावे ने बढ़ाई ममता बनर्जी की मुश्किलें

सुष्मिता देव का यह इस्तीफा टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के उस सनसनीखेज दावे के ठीक दो दिन बाद आया है, जिसने पूरी पार्टी में खलबली मचा दी थी. दस्तीदार ने सोमवार को मीडिया के सामने दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 लोकसभा और राज्यसभा सांसद केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ने की इच्छा जता चुके हैं. दस्तीदार के मुताबिक, इन सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक आधिकारिक पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी सौंपा जा चुका है.

आपको बता दें कि काकोली घोष दस्तीदार इस वक्त टीएमसी के बागी गुट की कमान संभाल रही हैं और उन्हें इस असंतुष्ट गुट का ‘चीफ व्हिप’ (मुख्य सचेतक) बनाया गया है, जबकि सीनियर सांसद शताब्दी रॉय को बागी गुट का डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया है. इस बगावत से साफ है कि टीएमसी के भीतर असंतोष का दायरा उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा है.

दिल्ली तक पहुंची बंगाल की सियासी आंच

पश्चिम बंगाल से शुरू हुई इस बड़ी सियासी हलचल का सीधा और साफ असर अब देश की राजधानी नई दिल्ली की राजनीति में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. इस भारी उठापटक के बीच, तृणमूल कांग्रेस के एक और प्रमुख सांसद पार्थ भौमिक ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित उस सरकारी बंगले को आधिकारिक तौर पर खाली कर दिया, जो पिछले कई सालों से राजधानी में टीएमसी की राजनीतिक गतिविधियों और रणनीतिक बैठकों का मुख्य केंद्र (हेडक्वार्टर) बना हुआ था.

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भौमिक ने खुद ही संसद प्रशासन से उस घर को छोड़ने की लिखित गुजारिश की थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण बंगले को खाली किया जाना इस बात का स्पष्ट और मजबूत संकेत है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और बागी सांसदों के बीच का तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी मुमकिन नहीं दिख रही.

टीएमसी शीर्ष नेतृत्व का कड़ा पलटवार

दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते जा रहे इस आंतरिक विद्रोह पर तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भी अब अपना रुख बेहद कड़ा और हमलावर कर लिया है. मंगलवार को कोलकाता में आयोजित एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, टीएमसी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के रवैये और उनके बयानों की तीखी आलोचना की.

बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो नेता पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से खुश नहीं हैं, उन्हें नैतिकता के आधार पर तुरंत अपने सांसद पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि संगठन में रहते हुए सार्वजनिक रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना और अनुशासनहीनता फैलाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यदि किसी को कोई गंभीर मतभेद हैं, तो सही और सम्मानजनक रास्ता यही है कि वे पहले अपना पद छोड़ें और फिर बाहर जाएं.

Chandan Das

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