Suvendu Adhikari CAA
Suvendu Adhikari CAA : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। राज्य की कमान संभालते ही उन्होंने सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि राज्य के भीतर जो भी लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं और अवैध रूप से रह रहे हैं, उनके खिलाफ अब बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली राजनीतिक व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि अब पश्चिम बंगाल में समय बदल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की राज्य सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग (घेराबंदी) के लिए केंद्रीय एजेंसियों को जमीन देने की अनुमति नहीं दे रही थी। लेकिन अब राज्य में एक राष्ट्रभक्त सरकार सत्ता में आ चुकी है, जिसके लिए देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसी सोच के तहत सरकार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तत्काल प्रभाव से जमीन आवंटित कर रही है।
शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती सरकार पर वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति करने का बड़ा आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि इसी राजनीतिक स्वार्थ के कारण सीमा पर कंटीले तार लगाने के काम को रोका गया था। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही महज 11 दिनों के भीतर इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग और बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के निर्माण के लिए (18 किलोमीटर + 9 किलोमीटर) कुल 27 किलोमीटर जमीन का मालिकाना हक सौंप दिया है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में एक बेहद कड़ा कानून आज से ही लागू करने की घोषणा की है। इस नए नियम के मुताबिक, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आने वाले सात चिन्हित समुदायों के जिन शरणार्थियों ने नागरिकता के लिए वैध अपील की है, उन्हें छोड़कर बाकी सभी अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जाएगी। ऐसे किसी भी संदिग्ध या अवैध घुसपैठिए को तुरंत हिरासत में लेकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हाथों सौंप दिया जाएगा। इस कानून के लागू होने से सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सख्त हो जाएगी।
नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए का मुख्य उद्देश्य भारत के तीन पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान—से आए पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को सम्मानजनक तरीके से भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। इस कानून के तहत उन गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का कानूनी प्रावधान किया गया है, जो अपने देशों में धार्मिक प्रताड़ना और उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने पर मजबूर हुए थे।
इस कानून के तहत मुख्य रूप से छह धार्मिक समुदायों को शामिल किया गया है, जिनमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं। सीएए का लाभ उठाने के लिए सरकार ने एक निश्चित समयसीमा तय की है। इसके मुताबिक, जो भी शरणार्थी इन छह समुदायों से ताल्लुक रखते हैं और 31 दिसंबर 2014 से पहले या उस तारीख तक पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान से भागकर भारत आ चुके थे, वे सभी भारतीय नागरिकता पाने के पात्र माने जाएंगे।
संसद से साल 2019 में पारित हुए इस कानून को लेकर देश भर में काफी लंबा विवाद और राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। विवाद की मुख्य वजह यह थी कि इस कानून के दायरे से मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है, क्योंकि संबंधित तीन पड़ोसी देश इस्लामिक राष्ट्र हैं। सरकार और विशेषज्ञों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी भी वैध भारतीय नागरिक की नागरिकता छीनने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि पड़ोसी देशों में अत्याचार झेल रहे विशिष्ट शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का एक मानवीय माध्यम है।
Read More : Cockroach Janta Party : CJI के ‘कॉकरोच’ बयान पर बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, सोशल मीडिया पर आए लाखों फॉलोअर्स
TMC Leader Arrest : पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ…
Surajpur Congress Protest : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में राजनीतिक पारा पूरी तरह गरमा गया…
QUAD Meeting : भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित क्वाड (QUAD) समूह की एक…
QUAD Meeting : भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित क्वाड (QUAD) समूह की एक…
Bangladesh Border News : पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सत्ता में बड़ा उलटफेर होने और भारतीय…
Septic Tank Accident : ओडिशा के कालाहांडी जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई…
This website uses cookies.