Syria Hospital Massacre: सीरिया से सामने आए एक दिल दहला देने वाले वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है। यह वीडियो स्वेदा नेशनल हॉस्पिटल का है, जहां कथित तौर पर सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की समर्थक सेनाओं ने निहत्थे लोगों को गोली मार दी।

मानवाधिकार संगठन सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) द्वारा जारी इस फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ लोग, जिन्हें मरीज या बंदी बताया जा रहा है, अस्पताल की यूनिफॉर्म में घुटनों के बल बैठे हैं। उनके चारों ओर हथियारबंद लड़ाके खड़े हैं। एक व्यक्ति को चेहरे पर थप्पड़ मारने के बाद नजदीक से गोली मार दी जाती है। इसके तुरंत बाद गोलियों की बौछार शुरू होती है और कई लोगों की मौके पर मौत हो जाती है।

कब और कहां हुई यह वारदात?
यह भयावह घटना जुलाई 2025 में सीरिया के स्वेदा शहर की है, जहां द्रूज़ लड़ाकों और सुन्नी बेडौइन जनजातियों के बीच हिंसक झड़पें हो रही थीं। बताया जा रहा है कि संघर्ष के बीच सरकारी सैनिकों को युद्धविराम लागू करने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन्होंने एक पक्ष का समर्थन करना शुरू कर दिया और हालात बेकाबू हो गए।
वीडियो से मचा हंगामा, उठी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
SOHR और स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, सीरियाई सरकार के सुरक्षाबल बेडौइन गुटों के साथ मिलकर द्रूज़ समुदाय को निशाना बना रहे हैं। द्रूज़ समुदाय के आध्यात्मिक नेता शेख हिकमत अल-हिजरी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में पेश करने की बात कही है और अस्पतालों को सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित रखने की अपील की है।
इजराइल का दुर्लभ हस्तक्षेप
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें इजराइल ने भी हस्तक्षेप किया है, जो दक्षिणी सीरिया में अपनी भूमिका को लेकर आमतौर पर सतर्क रहता है।
द्रूज़ समुदाय, जो इजराइल में भी रहता है और वहां की सेना में सेवा देता है, ने इजराइली कार्रवाई को समुदाय के नरसंहार को रोकने में अहम बताया। यह इजराइल द्वारा सीरियाई संघर्ष में एक दुर्लभ प्रत्यक्ष दखल माना जा रहा है।
सीरियाई सरकार का बचाव या चुप्पी?
अब तक दमिश्क की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जबकि IDF (इजराइल डिफेंस फोर्स) और SOHR जैसे संगठनों ने घटना की पुष्टि की है। अगर यह वीडियो सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का स्पष्ट उल्लंघन है, विशेष रूप से जिनेवा कन्वेंशन के तहत अस्पतालों को “सुरक्षित जोन” माना जाता है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि सीरिया में युद्ध और राजनीति ने मानवीय मूल्यों को किस हद तक कुचल दिया है। अस्पताल जैसी जगहों पर भी अब लोग सुरक्षित नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मौन सहमति अब सवालों के घेरे में है।
क्या संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय अदालतें अब भी केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेंगी या कुछ ठोस कदम उठाए जाएँगे, यह देखना बाकी है।
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