Dhamtari Encroachment Drive: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम कोलियारी में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र का माहौल गरमा दिया है। ग्राम कोलियारी के खसरा नंबर 905, 906 और 907 की भूमि को शासकीय प्रयोजन के लिए आरक्षित किया गया है। 18 जून 2026 को अतिरिक्त तहसीलदार, धमतरी द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के तहत, प्रशासन ने यहां बने अवैध कब्जों को स्वेच्छा से हटाने का कड़ा निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण पाया जाता है, तो बिना किसी अतिरिक्त सूचना के बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, अतिक्रमण हटाने में होने वाला पूरा खर्च भी संबंधित लोगों से ही वसूला जाएगा। इस नोटिस के चस्पा होने के बाद से ही गांव के करीब 50 परिवारों में अपनी आशियाने छिनने का डर और आक्रोश व्याप्त है।

ग्रामीणों का दर्द: बरसों का बसेरा और बेघर होने का संकट
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस भूमि पर पिछले कई वर्षों से रह रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से अपने घर बनाए हैं। इस अचानक आई प्रशासनिक कार्रवाई ने गरीबों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। ग्रामीण नयन दास ने भावुक होकर बताया कि उनकी उम्र 60 वर्ष है और इस उम्र में बेघर होने पर वे आखिर कहां जाएंगे। ग्रामीणों की मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिए गए हैं और न ही ग्राम पंचायत उनकी मदद के लिए आगे आ रही है। मनीषा सोनकर जैसी ग्रामीणों का तर्क है कि जहां गरीब लोग बसे हैं, वहां हॉस्टल बनाने की योजना के तहत उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जिससे उनका पूरा परिवार सड़कों पर आ जाएगा। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और अचानक उन्हें अवैध घोषित कर दिया गया है।

विधायक ओंकार साहू का हस्तक्षेप, ग्रामीणों को दिया सुरक्षा का भरोसा
ग्रामीणों की आपबीती सुनने के बाद धमतरी विधायक ओंकार साहू शुक्रवार शाम कोलियारी पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक ने तत्काल अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और स्थिति की गंभीरता को समझा। ओंकार साहू ने स्पष्ट लहजे में कहा कि बारिश के इस मौसम में किसी भी परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े हैं और किसी भी हाल में घरों को टूटने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के नाते वे प्रशासन के साथ संवाद कर रहे हैं और अधिकारियों ने उन्हें फिलहाल किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ न करने का आश्वासन दिया है।
प्रशासन की सख्त नीति बनाम जनभावनाओं का टकराव
इस पूरे मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है। एक ओर धमतरी प्रशासन शासकीय भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के अपने फैसले पर अडिग है, ताकि भविष्य में यहां सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। वहीं दूसरी ओर, विधायक के समर्थन और ग्रामीणों के विरोध ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच यह गतिरोध बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच कोई मध्यम मार्ग निकलता है या यह मामला और अधिक तूल पकड़ेगा। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें अब विधायक के प्रयासों और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।











