NASA Swift Telescope Rescue: ब्रह्मांड के रहस्यमयी ‘गामा-रे बर्स्ट’ (Gamma-ray bursts) का अध्ययन करने वाले नासा के प्रतिष्ठित ‘स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ (Swift Observatory) को सुरक्षित रखने के लिए शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और अनूठा रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। यह टेलीस्कोप, जो ब्रह्मांडीय विस्फोटों पर नजर रखता है, वर्तमान में पृथ्वी के वायुमंडल में गिरने के खतरे का सामना कर रहा था। इसे बचाने के उद्देश्य से, तीन रोबोटिक भुजाओं से लैस एक विशेष स्पेसक्राफ्ट, जिसे ‘लिंक’ (Link) नाम दिया गया है, को अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह स्पेसक्राफ्ट कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज (Katalyst Space Technologies) द्वारा निर्मित है। मिशन की सफलता के लिए इसे मार्शल द्वीप समूह से एक अनोखे तरीके से लॉन्च किया गया, जो अंतरिक्ष अभियानों में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

रॉकेट की अनोखी लॉन्चिंग: हवा में उड़ते विमान से शुरुआत
इस मिशन की सबसे खास बात इसकी लॉन्चिंग तकनीक रही। एयरोस्पेस कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन द्वारा उपयोग किए गए ‘पेगासस रॉकेट’ ने जमीन से उड़ान भरने के बजाय, हवा में उड़ रहे एक विशेष रूप से मॉडिफाई किए गए विमान के निचले हिस्से से उड़ान भरी। यह तरीका न केवल खर्चीला कम है बल्कि अधिक सटीक भी है। ‘लिंक’ स्पेसक्राफ्ट को अब नासा के स्विफ्ट टेलीस्कोप तक पहुंचने के लिए एक सटीक प्रक्षेपवक्र (trajectory) पर स्थापित कर दिया गया है। नासा और कैटालिस्ट कंपनी को उम्मीद है कि यह स्पेसक्राफ्ट लगभग एक महीने की यात्रा के बाद अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा। इस पूरी चुनौतीपूर्ण योजना को मात्र नौ महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है, जो वैज्ञानिकों की तत्परता को दर्शाता है।

सौर तूफानों से बढ़ता खतरा और मिशन की गंभीरता
वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया 1.6 टन वजनी स्विफ्ट टेलीस्कोप वर्तमान में पृथ्वी से 360 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हाल के दिनों में भीषण सौर तूफानों के कारण वायुमंडलीय घर्षण (atmospheric drag) काफी बढ़ गया है, जिससे यह टेलीस्कोप तेजी से नीचे की ओर गिर रहा है। यदि यह बचाव मिशन समय पर नहीं भेजा जाता, तो अक्टूबर तक यह अमूल्य वैज्ञानिक यंत्र पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जलकर नष्ट हो जाता। नासा ने इस मिशन की संवेदनशीलता को समझते हुए इसे प्राथमिकता दी और कैटालिस्ट कंपनी को इसके लिए 30 मिलियन डॉलर (लगभग ₹250 करोड़) का भुगतान किया है। टेलीस्कोप को सुरक्षित करने के लिए फिलहाल इसके वैज्ञानिक ऑपरेशन्स को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: रोबोटिक भुजाओं से कक्षा को उठाना
यह अंतरिक्ष ऑपरेशन तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल है। एक महीने की यात्रा के बाद, ‘लिंक’ स्पेसक्राफ्ट अपनी तीन रोबोटिक भुजाओं का उपयोग करके स्विफ्ट टेलीस्कोप को मजबूती से पकड़ लेगा। इसके बाद, ‘लिंक’ के थ्रस्टर्स धीरे-धीरे फायर किए जाएंगे, ताकि बिना किसी झटके के टेलीस्कोप को उसकी मूल ऊंचाई पर वापस ले जाया जा सके। इस मिशन का लक्ष्य स्विफ्ट की कक्षा को लगभग 150 मील (240 किलोमीटर) ऊपर उठाना है। हालांकि खराब मौसम के कारण लॉन्चिंग में कई बार देरी हुई, लेकिन अब सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है। यदि यह अभियान सफल रहता है, तो सितंबर तक स्विफ्ट टेलीस्कोप पुनः ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने के लिए सक्रिय हो जाएगा।
हबल टेलीस्कोप के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद
स्विफ्ट का यह रेस्क्यू मिशन अंतरिक्ष अभियानों के इतिहास में एक ‘टर्निंग पॉइंट’ बन सकता है। नासा का प्रसिद्ध हबल स्पेस टेलीस्कोप भी इसी प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है और सूरज की गतिविधियों के कारण धीरे-धीरे अपनी कक्षा खो रहा है। यदि कैटालिस्ट का यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में हबल टेलीस्कोप की उम्र बढ़ाने के लिए भी इसी प्रकार के रोबोटिक ऑपरेशन की राह आसान हो जाएगी। यह मिशन न केवल एक टेलीस्कोप को बचाएगा, बल्कि यह भी साबित करेगा कि अंतरिक्ष में मौजूद पुराने लेकिन कीमती उपकरणों को नई तकनीक के जरिए कैसे लंबे समय तक कार्यशील रखा जा सकता है।
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