Amir Khan Muttaqi India Visit: अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी गुरुवार को दिल्ली पहुंचे हैं। यह उनकी लगभग सात दिन की भारत यात्रा है, जो अगस्त 2021 के बाद तालिबान के सबसे उच्च स्तरीय प्रतिनिधि की भारत यात्रा मानी जा रही है। इस दौरे का मकसद द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करना है।

मुलाकात से पहले झंडा प्रोटोकॉल बना चुनौती
मुत्तकी की विदेश मंत्री एस. जयशंकर से 10 अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती सामने आई है। भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। ऐसे में भारत में अफगानिस्तान के दूतावास में अभी भी पुराने अफगान झंडे का प्रयोग हो रहा है, जबकि तालिबान का झंडा फहराने की अनुमति नहीं है।

जब मुत्तकी जयशंकर से मुलाकात करेंगे, तो कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत दोनों देशों के झंडे साथ होने चाहिए। लेकिन भारत की नीति के कारण अधिकारियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि बैठक के दौरान तालिबान का झंडा कैसे रखा जाए। यह मुद्दा जनवरी में दुबई में हुई मुलाकात में भी चर्चा में था, तब कोई झंडा नहीं फहराया गया था।
सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल भी करेंगे दर्शन
मुत्तकी की यात्रा केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं है। 11 अक्टूबर को वे सहारनपुर के प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद मदरसे का दौरा करेंगे। यह मदरसा पूरे विश्व में मुस्लिम विचारधारा के केंद्र के रूप में जाना जाता है।
इसके बाद 12 अक्टूबर को मुत्तकी आगरा में ताजमहल का भी दौरा करेंगे। साथ ही नई दिल्ली में प्रमुख उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी करेंगे, जिसे चैंबर ऑफ कॉमर्स आयोजित करेगा।
महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता
राजनीतिक स्तर पर सबसे अहम मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ 10 अक्टूबर को हैदराबाद हाउस में होगी। इस बैठक में अफगान-भारत संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवीय सहायता, वीजा सुविधाएं और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठेंगे। मुत्तकी को इस दौरान विदेश मंत्री के समान कूटनीतिक सम्मान मिलेगा।
इसके अलावा, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुत्तकी की बैठक हो सकती है, जिसमें आतंकवाद निरोध, सुरक्षा, अफगान छात्रों और व्यापारियों के वीजा मामलों पर चर्चा हो सकती है।
तालिबान को मान्यता देने पर भारत की स्थिति
अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अफगानिस्तान में अपना दूतावास बंद कर दिया और तालिबान सरकार को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। लेकिन दोनों देशों के बीच लंबे समय से बैकडोर डिप्लोमेसी जारी है। मुत्तकी की यह यात्रा इस कूटनीतिक संवाद को और मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
भारत अफगानिस्तान में स्थिरता, मानवीय सहायता और आतंकवाद के मुद्दों पर तालिबान से संवाद बनाए रखना चाहता है, खासकर सीमा पार सक्रिय आतंकवादी संगठन टीटीपी के मद्देनजर।अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा में राजनीतिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर कई अहम चर्चाएं होंगी। झंडे के प्रोटोकॉल से लेकर मानवीय सहायता तक कई जटिल मुद्दे चर्चा का हिस्सा होंगे। यह दौरा भारत-अफगानिस्तान संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है।











