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Tamil Nadu tender controversy : तमिलनाडु में टेंडर विवाद पर सियासी बवाल, विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार ने लिया यू-टर्न

Tamil Nadu tender controversy : दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित सरकार ने एक विवादित सरकारी टेंडर जारी करने के कुछ ही घंटों के भीतर उसे आनन-फानन में रद्द कर दिया है। सरकार को यह कदम मुख्य विपक्षी दल के उन तीखे आरोपों के बाद उठाना पड़ा, जिसमें कहा गया था कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से अपारदर्शी रखा गया और इसे सिर्फ किसी एक पसंदीदा और खास ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस त्वरित रद्दीकरण के बाद भी राज्य का सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।

मात्र छह घंटे की समय-सीमा ने खड़े किए गंभीर सवाल, कांचीपुरम जिले से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा विवाद बीती 19 मई को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक टेंडर से जुड़ा हुआ है। यह टेंडर कांचीपुरम ज़िले के एक ग्रामीण इलाके में 30,000 लीटर की भारी क्षमता वाला एक ओवरहेड पानी का टैंक (पानी की टंकी) निर्माण करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 16.83 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। इस ठेके से जुड़ा विज्ञापन सुबह ठीक 9 बजे सरकारी पोर्टल पर प्रकाशित किया गया, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इसके लिए ऑनलाइन बोली जमा करने की अंतिम समय-सीमा उसी दिन दोपहर 3 बजे तय कर दी गई थी। इस प्रकार, इच्छुक बोलीदाताओं को इस बड़े सरकारी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए महज़ छह घंटे का ही समय दिया गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्क्रीनशॉट, विपक्ष ने लगाया ‘सोची-समझी कॉन्ट्रैक्ट पॉलिटिक्स’ का आरोप

जैसे ही इस अजीबोगरीब टेंडर के विवरण के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लीक हुए, वैसे ही इंटरनेट पर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी आलोचना शुरू हो गई। इतनी कम समयावधि को लेकर लोगों ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। प्रमुख विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और इसे सरकार की ‘सोची-समझी कॉन्ट्रैक्ट पॉलिटिक्स’ करार दिया। द्रमुक ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और किसी विशेष कॉर्पोरेट कंपनी को सीधा फायदा पहुंचाने की फिक्सिंग है।

विपक्षी नेताओं ने उठाए तीखे सवाल: छह घंटे में कैसे तैयार हो सकती है विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट?

द्रमुक (DMK) के प्रदेश उप-सचिव अमुथरसन ने इस मामले को लेकर सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए संबंधित विभाग के मंत्री एन. आनंद को सीधे तौर पर अपने निशाने पर लिया। अमुथरसन ने पूछा कि दुनिया की कोई भी वैध कंपनी आखिर महज़ छह घंटे के भीतर किसी निर्माण कार्य की इतनी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) कैसे तैयार कर सकती है और टेंडर से जुड़ी सभी कानूनी औपचारिकताएं कैसे पूरी कर सकती है? उन्होंने इसे प्रशासनिक तेजी मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि नई सरकार के सत्ता संभालने के तुरंत बाद इस तरह की अंधी जल्दबाजी दिखाना इसके पीछे के किसी बड़े घालमेल की तरफ इशारा करता है।

पारदर्शिता अधिनियम के उल्लंघन का आरोप, चौतरफा घिरी सरकार ने प्रशासनिक कारणों का दिया हवाला

पूरी निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग करते हुए विपक्षी दल डीएमके ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि इस कदम से ‘तमिलनाडु टेंडर पारदर्शिता अधिनियम’ का खुलेआम और सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक संदेह नहीं है, बल्कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का सीधा आरोप है। चौतरफा ऑनलाइन ट्रोलिंग और विपक्षी घेराबंदी से घबराकर टीवीके (TVK) सरकार ने उसी दिन देर शाम प्रशासनिक कारणों का आधिकारिक हवाला देते हुए टेंडर को निरस्त कर दिया, लेकिन इस फैसले से भी उपजा राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।

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