CM Vishnu Deo Sai : दुर्ग जिले के गनियारी गांव में पद्म विभूषण से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के दशगात्र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शोक सभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश के कई वरिष्ठ मंत्री, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।

कार्यक्रम के दौरान दुर्ग सांसद विजय बघेल, विधायक अनुज शर्मा, राज्य मंत्री मोना सेन और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित तमाम गणमान्य व्यक्तियों ने दिवंगत लोक कलाकार की स्मृति में पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वातावरण में हर तरफ भावुकता का माहौल था, जहाँ लोग अपनी प्रिय कलाकार को अंतिम नमन करने पहुँचे थे।

मुख्यमंत्री ने तीजन बाई को बताया छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. तीजन बाई को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का पर्याय और एक ‘अमूल्य धरोहर’ निरूपित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत पंडवानी गायन शैली के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे विश्व में राज्य का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। मुख्यमंत्री ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक ऐसा सितारा खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने स्मरण किया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया था और प्रधानमंत्री ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष रूप से उनके योगदान का उल्लेख कर उन्हें सम्मान दिया था।
मुख्यमंत्री साय की तीन ऐतिहासिक घोषणाएँ
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को संजोने और लोक कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तीन बड़ी घोषणाएं कीं:
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डॉ. तीजन बाई राज्य अलंकरण: भविष्य में लोक कला के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को ‘डॉ. तीजन बाई राज्य अलंकरण पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा, ताकि उनका नाम सदैव जीवित रहे।
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शिक्षण संस्थान का नामकरण: गनियारी स्थित शासकीय स्कूल का नाम अब आधिकारिक तौर पर ‘डॉ. तीजन बाई’ के नाम पर रखा जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ले सकें।
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स्मृति का संरक्षण: लोक कला की इस महान साधिका का ‘तंबूरा’ रायपुर स्थित संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित किया जाएगा, जो उनकी गौरवशाली विरासत का साक्षी बना रहेगा।
एक युग का अवसान: लोक संस्कृति की महान साधिका को याद
पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से ही छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश-विदेश में शोक की लहर दौड़ गई थी। दशगात्र कार्यक्रम में जुटी भीड़ यह बताने के लिए पर्याप्त थी कि डॉ. तीजन बाई का आम लोगों के दिलों में कितना बड़ा स्थान था। उन्होंने अपने जीवनकाल में महाभारत की कथाओं को पंडवानी के माध्यम से जिस जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया, उसने उन्हें कला जगत का अमर व्यक्तित्व बना दिया। उनके जाने से लोक संगीत के एक गौरवशाली युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके द्वारा स्थापित की गई परंपराएं हमेशा जीवित रहेंगी।











