Tejashwi Yadav Voter ID : तेजस्वी यादव का वोटर ID विवाद,चुनाव आयोग की जांच, फर्जीवाड़े पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई

Tejashwi Yadav Voter ID : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया कि उनका नाम हालिया ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। उन्होंने इस दावे के समर्थन में अपना वोटर आईडी कार्ड और उसका EPIC नंबर भी सार्वजनिक किया।

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चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

तेजस्वी यादव के दावे और EPIC नंबर के सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग हरकत में आ गया। आयोग ने कहा कि तेजस्वी द्वारा साझा किया गया EPIC नंबर पिछले 10 वर्षों से उसके रिकॉर्ड में नहीं है। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने वह EPIC नंबर भी जारी किया, जो तेजस्वी ने पिछली बार अपने चुनावी हलफनामे में दर्ज किया था। इस घटनाक्रम के बाद राजद, बीजेपी और जेडीयू समेत राज्य की सभी बड़ी पार्टियों के नेता इस मुद्दे पर बयानबाजी कर रहे हैं।

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क्या है दो वोटर ID कार्ड रखने पर कानून?

देश में दो या अधिक वोटर ID कार्ड रखना एक गंभीर अपराध है। दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार डेढ़ा के अनुसार, इस अपराध के लिए व्यक्ति को एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह प्रावधान ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950’ की धारा 17 और 31 के अंतर्गत आता है। इन धाराओं के तहत फर्जी या दोहरे पंजीकरण को चुनावी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

अगर गलती से बने दो वोटर ID, तो क्या करें?

अक्सर लोग राज्य या पता बदलने पर नए पते पर वोटर कार्ड बनवा लेते हैं, लेकिन पुराने पते से नाम हटवाना भूल जाते हैं। ऐसे मामलों में भी यह कानूनी तौर पर गलत होता है। चुनाव आयोग ऐसे मामलों में पहले नोटिस जारी करता है और व्यक्ति से स्पष्टीकरण मांगता है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है।

अगर किसी के पास गलती से दो वोटर ID कार्ड हैं, तो वह चुनाव आयोग की वेबसाइट NVSP.in या नजदीकी निर्वाचन कार्यालय में संपर्क कर एक पते से नाम हटवा सकता है। इसके लिए ‘फॉर्म 7’ भरना होता है।

तेजस्वी मामले में अब आगे क्या?

तेजस्वी यादव द्वारा जारी EPIC नंबर की वैधता पर सवाल उठने के बाद अब यह मामला गंभीर हो गया है। चुनाव आयोग इसकी गहराई से जांच कर रहा है। यदि यह साबित होता है कि तेजस्वी के पास दो या फर्जी वोटर ID हैं, तो उनके खिलाफ ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे उनकी राजनीतिक छवि को बड़ा नुकसान हो सकता है।

राजनीति में बड़े चेहरों से जुड़े ऐसे मामलों पर देशभर की नजर होती है, इसलिए चुनाव आयोग की रिपोर्ट और तेजस्वी यादव का अगला कदम अब सबकी निगाहों में है।

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