Naxal surrender
Naxal surrender: नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कुल 130 नक्सलियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी स्वयं उपस्थित थे। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में सबसे बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ के कैडर्स की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरेंडर करने वाले 130 माओवादियों में से 125 मूल रूप से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने इन सभी का स्वागत करते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और हिंसा का रास्ता त्याग कर शांतिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।
सरकार की उदार पुनर्वास नीति इन नक्सलियों के हृदय परिवर्तन का एक मुख्य कारण बनकर उभरी है। आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व माओवादियों को नई जिंदगी शुरू करने के लिए सरकार की ओर से बड़ी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। पुनर्वास योजना के तहत, इन सभी 130 सदस्यों के लिए कुल 4 करोड़ 18 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस धनराशि का उपयोग उनके स्वरोजगार, शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि जब तक उग्रवाद की राह छोड़ने वालों को ठोस आर्थिक आधार नहीं दिया जाएगा, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
यह आत्मसमर्पण केवल संख्या बल के लिहाज से ही बड़ा नहीं है, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। समर्पित नक्सलियों ने अपने साथ बड़ी मात्रा में घातक हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे हैं। इनमें अत्याधुनिक इंसास (INSAS) राइफलें, कई अन्य प्रकार की राइफलें और बीजीएल (BGL) जैसे हथियार शामिल हैं। इन हथियारों की अनुमानित बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इन हथियारों का सरेंडर होना इस बात का प्रमाण है कि नक्सली संगठन अब अंदरूनी तौर पर कमजोर हो रहा है और उनके लड़ाकों का नेतृत्व पर से विश्वास उठ चुका है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए जो समय सीमा (डेडलाइन) तय की है, उसमें अब मात्र 24 दिन शेष रह गए हैं। इस समय सीमा के करीब आते ही सुरक्षाबलों ने जंगलों में अपना दबाव और तेज कर दिया है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि केवल बस्तर रेंज में ही पिछले 6 महीनों के भीतर 1300 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चौतरफा घेराबंदी और विकास कार्यों की पहुँच ने नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।
इस सामूहिक सरेंडर में नक्सली संगठन के कई रणनीतिक सदस्य भी शामिल हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी खुफिया जीत है। विशेष रूप से, हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी संगठन के चीफ देवजी की ‘PLGA कमांडर टीम’ के महत्वपूर्ण सदस्य भी इस समूह का हिस्सा हैं। हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC) में हुए इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नक्सली संगठन की टॉप लीडरशिप अब बिखर रही है। तेलंगाना और छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे माओवादी विचारधारा के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
कार्यक्रम के समापन पर सरकार की ओर से एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया गया कि उग्रवाद की राह पर भटक चुके युवाओं के लिए वापसी के द्वार हमेशा खुले हैं। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पुलिस प्रशासन ने दोहराया कि जो भी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की नई पुनर्वास नीति के तहत हर संभव मदद की जाएगी। यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षाबलों की सफलता है, बल्कि लोकतंत्र की उस जीत का भी प्रतीक है जहाँ गोलियों की जगह बातचीत और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
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