Pakistan terror network : भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों ने फिर से पाकिस्तान की ज़मीन पर ठिकाने बनाना शुरू कर दिया है। इन गतिविधियों के लिए अब ऑनलाइन फंडिंग और सरकारी समर्थन का सहारा लिया जा रहा है।
लश्कर-ए-तैयबा ने पंजाब प्रांत के मुरीदके स्थित अपने पुराने आतंकी कैंप उम्म अल-कुरा के नवीनीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार की अप्रत्यक्ष मदद और ऑनलाइन डोनेशन से फंडिंग की जा रही है। इस परियोजना को लेकर पाकिस्तान सरकार ने भी संगठन को आश्वासन दिया है, जिसका स्वागत मुस्लिम लीग के नेताओं ने खुलकर किया है।
इसी बीच जैश-ए-मोहम्मद ने 313 नए आतंकी ठिकानों की स्थापना के लिए एक अलग ऑनलाइन फंडिंग अभियान शुरू किया है। सोशल मीडिया और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के जरिए इन संगठनों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से आर्थिक सहायता मिल रही है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने खुद स्वीकार किया है कि देश की लगभग 15% डिजिटल ट्रांजेक्शन आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रही हैं, जो पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डाल सकती है।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकियों का पनाहगाह करार देता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और ISIS-खोरासान (ISIS-K) जैसे आतंकी संगठन वहां खुलेआम सक्रिय हैं।अमेरिका ने पाकिस्तान को 1993 में आतंक समर्थक देशों की लिस्ट में डाला था, और FATF ने 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था, जिससे उसे 2022 में निकाला गया था। अब एक बार फिर उसी सूची में वापसी की आशंका बढ़ गई है।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो लश्कर का सहयोगी संगठन है। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और POK में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।
पाकिस्तान में आतंक का इन्फ्रास्ट्रक्चर फिर से जीवित हो रहा है, और यह पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है। भारत के लिए यह कूटनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर चिंता का विषय है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भी अब पाकिस्तान की दोहरी नीति पर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
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