India Russia Partnership : संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए टैरिफ या द्वितीयक प्रतिबंध भारत-रूस संबंधों को प्रभावित नहीं कर पाएंगे। लावरोव ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी साझेदारियों का चुनाव स्वतंत्र रूप से करता है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

रूसी विदेश मंत्री ने एएनआई के सवाल के जवाब में कहा, “भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी खतरे में नहीं है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने साझेदारों का चयन स्वयं करता है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि अमेरिका के पास भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए कोई प्रस्ताव हैं तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन भारत अपने व्यापार और निवेश संबंध केवल संबंधित देशों के साथ ही तय करेगा।

भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का महत्व
सर्गेई लावरोव ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चल रही रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारे बीच एक विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है।” उन्होंने बताया कि भारत ने इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए इसे “विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया है, जो दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और सहयोग का परिचायक है।
लावरोव ने कहा कि भारत की विदेश नीति, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार किया गया है, पूरी तरह से भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखती है। “हम भारत के राष्ट्रीय हितों और नरेंद्र मोदी द्वारा अपनाई जा रही विदेश नीति का पूरा सम्मान करते हैं। हम दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखते हैं।”
रूस-भारत संबंधों का वैश्विक परिप्रेक्ष्य
लावरोव ने यह भी बताया कि भारत-रूस संबंधों को अमेरिका या किसी अन्य देश के साथ भारत के रिश्तों से तुलना नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घनिष्ठ समन्वय का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से, उन्होंने हाल ही में चीन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक को भी याद किया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।
रूस-भारत के बीच यह गहरा और विशेषाधिकार प्राप्त आर्थिक व रणनीतिक संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान वैश्विक संदर्भ में, जहां कई देश अपनी-अपनी पॉलिटिक्स और आर्थिक हितों के हिसाब से कदम उठा रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी विदेश नीति को संतुलित और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बनाए रखने का संकल्प लिया है। सर्गेई लावरोव का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत-रूस साझेदारी में कोई बाहरी दबाव इसे कमजोर नहीं कर सकता।
यह स्पष्ट है कि भारत और रूस दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी लाभकारी साबित होगा।
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