NHM employees warning: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल 27वें दिन भी जारी है। नियमितीकरण समेत 10 मांगों को लेकर आंदोलनरत कर्मियों को राज्य सरकार ने सख्त अल्टीमेटम दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारी मंगलवार तक ड्यूटी पर नहीं लौटे, तो 16,000 पदों को रिक्त मानते हुए बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सरकार का पक्ष:
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि कर्मचारियों की 10 में से 5 प्रमुख मांगें सरकार पहले ही मान चुकी है, जबकि बाकी मांगों पर विचार के लिए कमेटी गठित की गई है। ऐसे में अब आंदोलन को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्य पर लौटें।

हड़ताल जारी, कर्मचारियों ने जताई नाराजगी:
सरकार की चेतावनी के बावजूद हड़ताल पर डटे NHM कर्मियों का कहना है कि अब तक कोई मांग लिखित रूप में स्वीकार नहीं की गई है। उनकी मांगें केवल आश्वासन तक सीमित हैं। नाराज कर्मचारियों ने मनेंद्रगढ़ में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इच्छा मृत्यु की मांग भी की है।
कांग्रेस ने साधा निशाना:
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि BJP ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान NHM कर्मचारियों से नियमितीकरण का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की “गारंटी” से धोखा बताते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
“दमन का रास्ता अपना रही सरकार”: कांग्रेस
शुक्ला ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर विचार करने की बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है। चेतावनियों और बर्खास्तगी की धमकी से सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन कर रही है। कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों को प्रताड़ित किया गया तो पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
केंद्र ने झाड़ा पल्ला, राज्य सरकार के पाले में गेंद:
इस बीच केंद्र सरकार ने NHM कर्मियों के नियमितीकरण को राज्य सरकार का विषय बताया है। यानी अब पूरी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सरकार की है। ऐसे में कांग्रेस का सवाल है कि जब अधिकार राज्य सरकार के पास है, तो फिर वादों को पूरा करने में देरी क्यों?
NHM कर्मियों की हड़ताल अब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव का रूप लेती जा रही है। जहां एक ओर सरकार सख्ती के मूड में है, वहीं कर्मचारियों का आंदोलन और विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस मसले को संवाद से सुलझाती है या टकराव की राह और गहरी होती है।
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