Korba Drowning Tragedy: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शनिवार, 6 सितंबर को रिसदी इलाके में स्थित एक तालाब में नहाने गए तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। दुखद बात यह है कि तीनों बच्चे पुलिस लाइन में रहने वाले पुलिसकर्मियों के बेटे थे। इस हादसे ने न केवल उनके परिवारों को, बल्कि पूरे पुलिस विभाग और जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है।

नहाने गए थे तालाब, नहीं मिली जिंदगी
जानकारी के अनुसार, सुबह लगभग 10 बजे तीनों बच्चे नहाने के लिए रिसदी के तालाब की ओर गए थे। तालाब का पानी गहरा था और बच्चे तैरना नहीं जानते थे। नहाते समय वे गहराई में चले गए और डूब गए। वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने शोर मचाकर मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

अस्पताल ले जाया गया, पर जान न बच सकी
स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों की सहायता से बच्चों को तालाब से बाहर निकाला गया और तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पुलिस लाइन में मातम, SP पहुंचे मौके पर
चूंकि मृतक बच्चे पुलिसकर्मियों के परिवार से थे, इसलिए पुलिस लाइन में मातम छा गया। जैसे ही घटना की सूचना पुलिस अधीक्षक (SP) को मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और मामले की आंतरिक जांच के निर्देश दिए।
स्थानीय लोग बोले – तालाब की सुरक्षा नहीं थी पर्याप्त
इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने तालाब की असुरक्षित स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह तालाब काफी गहरा है और यहां बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई चेतावनी बोर्ड, बाउंड्री या निगरानी की व्यवस्था नहीं है। प्रशासन ने इस बात को गंभीरता से लिया है और क्षेत्रीय अधिकारियों को सुरक्षा उपायों की समीक्षा और सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इलाके में शोक का माहौल, लोग हुए भावुक
तीनों बच्चों की अचानक हुई मौत से कोरबा पुलिस लाइन और पूरे इलाके में शोक की लहर है। आसपास के लोग बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवारों के पास पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। तालाब के पास भी भारी भीड़ जुट गई, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
तीन मासूम जिंदगियों का इस तरह असमय समाप्त हो जाना कोरबा जिले के लिए एक गहरी पीड़ा और चेतावनी दोनों है। यह हादसा बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी व्यवस्था की जरूरत को उजागर करता है। पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस घटना से सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।










