TMC Resignation : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह अब अपने चरम पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर संगठन की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। इस श्रृंखला में पार्टी को एक और करारा झटका तब लगा जब टीएमसी के अल्पसंख्यक सेल के प्रदेश अध्यक्ष मोशरेफ हुसैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मोशरेफ हुसैन उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनके इस्तीफे को पार्टी में बढ़ती गुटबाजी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे जल्द ही बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो सकते हैं, जिससे टीएमसी के अल्पसंख्यक वोट बैंक और संगठन पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

विधानसभा सत्र में दिखी TMC की दोफाड़ स्थिति
बंगाल विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही टीएमसी का आंतरिक बिखराव सदन की कार्यवाही के दौरान सार्वजनिक हो गया। 18 जून को सत्र के पहले दिन पार्टी के विधायक दो स्पष्ट और विपरीत धड़ों में बैठे नजर आए। विपक्ष के बागी रुख अपनाने वाले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में लगभग 58 विधायकों का एक बड़ा समूह एक ओर बैठा था। इस गुट की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम भी शामिल थे, जिन्हें कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे विश्वासपात्र माना जाता था।

दूसरी तरफ, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा, कुणाल घोष और रुकबानुर रहमान जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में लगभग 14 विधायकों का एक दूसरा समूह मौजूद था, जो पूरी तरह से ममता बनर्जी के प्रति वफादारी जाहिर कर रहा था। इस बीच, विधायक नैना बंद्योपाध्याय की भूमिका भी काफी चर्चा में रही, लेकिन उन्होंने अंततः वफादार गुट के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
संसद तक पहुंची बगावत, NCPI में विलय की अटकलें
टीएमसी का यह संकट केवल राज्य विधानसभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने नई दिल्ली स्थित संसद के गलियारों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। पार्टी के 20 वरिष्ठ सांसदों ने, जिनमें सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं, केंद्रीय नेतृत्व से पूरी तरह दूरी बना ली है। इन बागी सांसदों ने एक बड़ा दावा पेश करते हुए कहा है कि उन्हें लोकसभा में टीएमसी के कुल सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक का समर्थन प्राप्त है।
अपनी बढ़ती संख्या बल के दम पर ये बागी अब तृणमूल कांग्रेस को ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय करने की योजना पर काम कर रहे हैं। पार्टी में हो रहे इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। यदि यह विलय सफल होता है, तो यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक पतन साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरी टीएमसी खेमा गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है।
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