Chhath Puja: छठ पूजा एक विशेष पर्व है जो सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित होता है। यह चार दिवसीय व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में व्रती कठिन उपवास रखते हैं और जलाशयों के किनारे खड़े होकर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए खास प्रकार के फल और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं जिनका धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। छठी मैया को प्रसन्न करने वाले 5 प्रमुख फल: 1. केला (Banana) केला एक पवित्र फल माना जाता है और यह भगवान विष्णु का प्रिय फल है। इसे छठी मैया को अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति, संतान की दीर्घायु और समृद्धि आती है। यह फल वर्ष भर उपलब्ध रहता है और इसकी धार्मिक मान्यता इसे पूजा में आवश्यक बनाती है। धार्मिक महत्व: भगवान विष्णु का वास होने के कारण यह फल विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वैज्ञानिक पक्ष: केला ऊर्जा से भरपूर होता है और व्रतधारियों के लिए पोषण का स्रोत भी है। 2. डाभ नींबू (Sweet Lemon / Pomelo) डाभ नींबू आकार में बड़ा और मोटे छिलके वाला फल होता है। इसे पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा में इसे चढ़ाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक महत्व: इसका मोटा छिलका इसे जूठा होने से बचाता है, जिससे यह पवित्र फल माना जाता है। वैज्ञानिक पक्ष: विटामिन C से भरपूर यह फल इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। 3. गन्ना (Sugarcane) गन्ना छठी मैया को अत्यंत प्रिय माना जाता है। यह न सिर्फ नई फसल का प्रतीक है, बल्कि जीवन में मिठास और सुख का भी संकेत देता है। धार्मिक महत्व: गन्ना छठी मैया को प्रिय है और इसे जोड़कर अर्घ्य देने का विशेष विधान होता है। वैज्ञानिक पक्ष: गन्ना ऊर्जा से भरपूर होता है और प्राकृतिक मिठास का स्रोत है। 4. नारियल (Coconut) नारियल को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इसे अत्यंत शुद्ध फल माना गया है। इसका कठोर खोल इसे अशुद्ध होने से बचाता है, इसलिए इसे पूजा में अवश्य शामिल किया जाता है। धार्मिक महत्व: नारियल समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक है। वैज्ञानिक पक्ष: नारियल पानी और गूदा, दोनों ही स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। 5. सिंघाड़ा (Water Chestnut) सिंघाड़ा जल में उगने वाला फल है और इसका सख्त आवरण इसे पवित्र बनाता है। इसे छठ पूजा में चढ़ाने से देवी लक्ष्मी की कृपा मिलती है। धार्मिक महत्व: सिंघाड़ा धन-धान्य की प्राप्ति और देवी लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक है। वैज्ञानिक पक्ष: इसमें आयरन और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। छठ पूजा में चढ़ाए जाने वाले ये पांच फल न सिर्फ धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक कारण भी छिपे हैं। इन फलों को अर्पित कर व्रती न केवल छठी मैया को प्रसन्न करते हैं, बल्कि अपने और अपने परिवार के सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना भी करते हैं। इस छठ पूजा, इन पवित्र फलों को पूजा की थाली में अवश्य शामिल करें और छठी मैया की कृपा पाएं। Read More :Andhra Eeconomic Loss: अमेरिकी शुल्क से अंध्रप्रदेश को ₹25,000 करोड़ का झटका, चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र से मांगी मदद














