Andhra Eeconomic Loss: अमेरिका द्वारा चिंगड़ी (श्रिम्प) निर्यात पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने से अंध्रप्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस संकट से उबरने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

चिंगड़ी निर्यात पर लगा भारी टैक्स
अमेरिका ने अंध्रप्रदेश से होने वाले चिंगड़ी निर्यात पर कुल 59.72% तक शुल्क लगा दिया है, जिसमें शामिल हैं:

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50% सामान्य टैरिफ
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5.76% क्षतिपूर्ति शुल्क (Compensatory Duty)
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3.96% एंटी-डंपिंग ड्यूटी
इससे अंध्रप्रदेश के समुद्री उत्पाद निर्यातक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लगभग 2,000 कंटेनरों पर ₹600 करोड़ से अधिक का टैक्स लगाया गया है।
₹25,000 करोड़ का अनुमानित नुकसान
राज्य सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए शुल्क के कारण अंध्रप्रदेश को अब तक करीब ₹25,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। निर्यात आदेशों का लगभग 50% रद्द कर दिया गया है। इससे लाखों मछुआरे और चिंगड़ी किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं।
केंद्र को चिट्ठी, जीएसटी छूट और आर्थिक पैकेज की मांग
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और राजीव रंजन सिंह को पत्र लिखकर केंद्र से GST में छूट, आर्थिक सहायता पैकेज और वैकल्पिक विदेशी बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है।
नायडू का कहना है कि अंदरूनी बाजार में समुद्री उत्पादों की खपत बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएं, जिससे निर्यात पर निर्भरता कम हो सके।
FTA की वकालत
नायडू ने सरकार से आग्रह किया है कि भारत को यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब और रूस जैसे देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) करने चाहिए, ताकि चिंगड़ी निर्यातकों को नए बाजार मिल सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है अंध्रप्रदेश का समुद्री निर्यात?
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भारत के कुल चिंगड़ी निर्यात का 80% अंध्रप्रदेश से होता है।
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समुद्री उत्पादों के कुल निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 34% है।
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अंध्र का वार्षिक समुद्री निर्यात ₹21,246 करोड़ का है।
राज्य सरकार के अनुसार, इस उद्योग पर 2.5 लाख से अधिक मछुआरे और किसान सीधे तौर पर निर्भर हैं, जबकि लगभग 30 लाख लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
अमेरिकी शुल्क नीति ने अंध्रप्रदेश की अर्थव्यवस्था और समुद्री निर्यात उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का केंद्र से मांग करना दर्शाता है कि यह केवल राज्य का नहीं, राष्ट्रीय स्तर का व्यापारिक संकट है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और संकटग्रस्त उद्योग को कितनी राहत मिलती है।
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