Train Delays : अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड पर ट्रेनों के लगातार दो से तीन घंटे विलंब से चलने की समस्या अब यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचने के कारण मरीजों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और आम यात्रियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अपनी आगे की यात्रा की कनेक्टिंग ट्रेनें भी छोड़नी पड़ रही हैं। यात्रियों की इस गंभीर समस्या को लेकर सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति ने मोर्चा खोलते हुए अंबिकापुर मुख्य स्टेशन प्रबंधक को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा और ट्रेनों का समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने की मांग की।

समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से दूरभाष पर भी चर्चा की। डीआरएम ने समस्या के निराकरण के लिए सार्थक पहल करने का आश्वासन दिया है। जोनल रेलवे सलाहकार समिति (जेडआरयूसीसी) सदस्य मुकेश तिवारी ने बताया कि अंबिकापुर से चलने वाली कई ट्रेनें पिछले कुछ महीनों से नियमित रूप से दो से तीन घंटे विलंब से संचालित हो रही हैं। लगातार देरी के कारण यात्रियों की पूरी यात्रा व्यवस्था प्रभावित हो रही है और रेलवे की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजधानी जाने वाले यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर
अंबिकापुर को राजधानी रायपुर से जोड़ने वाली अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस ट्रेन क्रमांक 18241/18242 उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस ट्रेन से प्रतिदिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीज, विद्यार्थी, व्यापारी और आम नागरिक रायपुर की यात्रा करते हैं। ट्रेन के घंटों विलंब से पहुंचने के कारण दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले गरीब यात्रियों को राजधानी में अतिरिक्त समय रुकना पड़ता है। इससे उनके समय और धन दोनों का अतिरिक्त खर्च होता है।
समिति का कहना है कि अंबिकापुर से राजधानी तक की यात्रा सामान्य परिस्थितियों में लगभग दस घंटे में पूरी होनी चाहिए, लेकिन ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण यही सफर 13 से 14 घंटे तक लंबा हो जाता है।
कनेक्टिंग ट्रेन छूटने से श्रद्धालु भी परेशान
अंबिकापुर-शहडोल एक्सप्रेस सहित मेमू ट्रेनों के लगातार विलंबित संचालन से यात्रियों की आगे की यात्रा भी प्रभावित हो रही है। सावन के पावन महीने में उज्जैन सहित विभिन्न ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को कनेक्टिंग नर्मदा एक्सप्रेस तक नहीं मिल पा रही है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है।

पावर रिवर्सल में सुधार से घट सकता है डिटेंशन
जेडआरयूसीसी सदस्य मुकेश तिवारी ने सुझाव दिया कि अनूपपुर और शहडोल में अतिरिक्त पावर की व्यवस्था कर पावर रिवर्सल की प्रक्रिया को बेहतर किया जाए। इससे ट्रेनों के डिटेंशन में करीब 30 से 40 मिनट तक की कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर-अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन बनने के बाद भी यात्री ट्रेनों की समय-सारिणी में अपेक्षित सुधार नहीं होना चिंता का विषय है।
समिति ने आरोप लगाया कि लॉन्ग हॉल मालगाड़ियों के संचालन के कारण यात्री ट्रेनों के परिचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके अलावा रेल वन सहित विभिन्न रेलवे ऐप्स पर विलंबित ट्रेनों को राइट टाइम प्रदर्शित किए जाने की शिकायतों पर भी प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई है, ताकि यात्रियों को गलत जानकारी के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
43.42 प्रतिशत पंक्चुअलिटी पर उठे सवाल
समिति ने कहा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर डिवीजन की ट्रेन पंक्चुअलिटी भी चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर डिवीजन 43.42 प्रतिशत पंक्चुअलिटी के साथ 68वें स्थान पर है। समिति ने रेलवे से जनहित और यात्री सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
रेल संघर्ष समिति ने अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड की सभी यात्री ट्रेनों का समय पालन सुनिश्चित करने, लगातार विलंब के कारणों की जांच कराने तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश मिश्रा, नकुल सोनकर, जितेंद्र सिंह और विनोद जायसवाल सहित समिति के अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे











