Vishnu Dev Sai: छत्तीसगढ़ सरकार अब आदिवासी बहुल इलाकों और सामान्य क्षेत्रों के बीच बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद ‘गैप’ को दूर करने की दिशा में ठोस पहल कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में कार्ययोजना बनाने और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा, “जनजातीय बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए जरूरी है कि हम पहले वहां मौजूद बुनियादी कमियों की पहचान करें और फिर जनभागीदारी से उन कमियों को दूर करें। 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली ग्राम सभाएं इस दिशा में एक अहम मंच होंगी।”

‘आदि कर्मयोगी अभियान’ से जुड़ेगा जनसहयोग
राज्य सरकार ने ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के तहत जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इस अभियान के तहत 1,32,400 वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो गांवों में जाकर न केवल जागरूकता फैलाएंगे, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना विकास में सहभागी भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये वॉलंटियर्स गांव-गांव जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, बिजली और रोजगार जैसे क्षेत्रों में मौजूद कमियों की पहचान करेंगे। इसके बाद 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं में इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर ही समाधान खोजे जा सकें।
बनेंगे ‘आदि सेवा केंद्र’
आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने जानकारी दी कि ‘आदि सेवा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र आदिवासी गांवों में स्थायी सुविधा केंद्र के रूप में काम करेंगे। इनका उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी भी होगा। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, कृषि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी और मदद दी जाएगी।
समावेशी विकास की ओर कदम
राज्य सरकार का यह प्रयास आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और वहां समान विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे “पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच सुनिश्चित करें और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, युवाओं व स्वयंसेवी संगठनों को इस प्रक्रिया में शामिल करें।”
2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाएं आदिवासी विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती हैं, बशर्ते यह कवायद कागजों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर तक पहुंचे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास अब केवल सपना नहीं, हकीकत बन सकेगा।
Read More : ZIM vs NZ: न्यूजीलैंड कप्तान टॉम लैथम चोट के चलते दूसरे टेस्ट से बाहर, कीवी टीम की टेंशन बढ़ी










