Trump on China : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका निशाना बना है चीन और उसके दुर्लभ मृदा खनिजों पर संभावित निर्यात नियंत्रण का कदम। ट्रंप ने चीन के इस रुख को “आक्रामक” बताया और सोशल मीडिया के जरिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुली चेतावनी दी।

ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब इस महीने के अंत में होने वाली संभावित मुलाकात का कोई कारण नहीं दिखता, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच तनाव और गहराने की संभावना है। उनका कहना था, “चीन में कुछ बहुत ही अजीब चीजें हो रही हैं। वे दुनिया भर में पत्र भेज रहे हैं कि वे हर उस चीज़ पर नियंत्रण लगाना चाहते हैं जो रेयर अर्थ से जुड़ी हो, चाहे वह चीन में बनी हो या नहीं।”

क्या हैं दुर्लभ मृदा खनिज?
दुर्लभ मृदा खनिज (Rare Earth Minerals) वे तत्व हैं जो हाई-टेक उपकरणों, रक्षा तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों और मोबाइल फोन में अनिवार्य रूप से उपयोग किए जाते हैं। चीन इस क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, और इसी वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रंप की चेतावनी: लगेगा आर्थिक दंड
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि चीन अपने आदेशों पर अमल करता है, तो अमेरिका को भी जवाबी कदम उठाने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी, “संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में मैं चीन के इस कदम का आर्थिक रूप से विरोध करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा।” ट्रंप ने इशारा किया कि चीन की यह नीति वैश्विक बाजारों को बाधित कर सकती है और अंततः चीन के लिए भी नुकसानदेह साबित होगी।
अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध की वापसी?
ट्रंप के बयान ने एक बार फिर अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच भारी टैरिफ और व्यापारिक टकराव देखने को मिला था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन ने सच में निर्यात नियंत्रण लागू किए, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और अमेरिका अन्य देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की कोशिश करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के इस तीखे बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में फिर से तनाव उभरने लगा है। दुर्लभ मृदा खनिजों को लेकर बढ़ता विवाद न केवल दोनों देशों के आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए भी चुनौती बन सकता है।











