Trump claim on Iran
Trump claim on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हाल के अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान की सैन्य शक्ति को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की सेना को फिर से संगठित होने और अपने पुराने स्तर पर लौटने में कम से कम एक दशक (10 साल) का समय लग सकता है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी प्रहारों ने ईरान की सामरिक क्षमता को लगभग शून्य कर दिया है। हालांकि, इस भारी क्षति के बावजूद उन्होंने अभी संघर्ष की पूर्ण समाप्ति या ईरान की अंतिम हार की औपचारिक घोषणा करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि भले ही ईरान तबाह हो गया हो, लेकिन “सब कुछ खत्म हो गया” कहना अभी जल्दबाजी होगी।
ईरान के आर्थिक ढांचे पर बात करते हुए ट्रंप ने विशेष रूप से ‘खारग द्वीप’ का उल्लेख किया, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है और रणनीतिक रूप से ईरान के कुछ तेल बुनियादी ढांचों को अभी सुरक्षित रखा है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “खारग द्वीप का अब केवल एक छोटा हिस्सा ही सुरक्षित बचा है। उनके मुख्य निर्यात केंद्र और पाइपलाइनों पर हमले किए जा चुके हैं। यदि मैं चाहूं, तो अगले 5 मिनट में बचा-कुचा सब कुछ नष्ट कर सकता हूं, लेकिन फिलहाल मैंने संयम बरतने का फैसला किया है।”
ईरान के साथ भविष्य में किसी भी प्रकार की वार्ता के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ईरान भीतर से बातचीत करने के लिए काफी उत्सुक है। ट्रंप के मुताबिक, तेहरान पर बढ़ता दबाव उन्हें मेज पर आने के लिए मजबूर कर रहा है, लेकिन वे अभी उस स्थिति में नहीं हैं जहाँ कोई ठोस समझौता हो सके। उन्होंने कहा, “ईरान बातचीत के लिए बहुत उत्सुक है, लेकिन मुझे लगता है कि वे अभी उस कड़े फैसले के लिए तैयार नहीं हैं जो आवश्यक है।” दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अराघची ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान ने कभी भी युद्धविराम या बातचीत की मांग नहीं की है और वे अपनी रक्षा के लिए अंत तक लड़ने को तैयार हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी अभियान केवल ठिकानों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है। ट्रंप ने कहा, “हमने ईरान को सैन्य रूप से पराजित कर दिया है। उनकी वायुसेना अब अस्तित्व में नहीं है और उनकी वायु रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense Systems) पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।” उन्होंने दावा किया कि अब ईरान के पास अमेरिका के हवाई हमलों का मुकाबला करने के लिए कोई प्रभावी सुरक्षा कवच नहीं बचा है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के कई महत्वपूर्ण नेताओं को निशाना बनाकर उनके कमांड स्ट्रक्चर को छिन्न-भिन्न कर दिया गया है।
ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर अपना दबाव कम करने के मूड में नहीं है। जहाँ एक तरफ वे सैन्य श्रेष्ठता का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे कूटनीतिक रास्तों को भी पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते। ट्रंप की “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति का यह दूसरा चरण ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। हालांकि, ईरान का पलटवार करने का संकल्प और अमेरिकी दावों को नकारना इस बात की ओर इशारा करता है कि पश्चिम एशिया में यह तनाव अभी लंबी दूरी तय करेगा।
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