Iran Conflict
Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच ईरान पर संभावित हमले को लेकर मतभेदों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई हुई हैं। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों को गलत बताया जिनमें दावा किया गया था कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, जनरल डैन केन, ईरान पर किसी भी तरह की प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं। ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि यदि युद्ध की स्थिति बनती है, तो अमेरिकी सेना के पास इतनी शक्ति है कि वह आसानी से और निर्णायक रूप से जीत हासिल कर लेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट लिखकर इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने लिखा कि जनरल केन के युद्ध विरोधी होने की खबरें “100 प्रतिशत गलत” और भ्रामक हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यद्यपि जनरल केन या कोई भी विवेकशील व्यक्ति बेवजह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन एक सैनिक के रूप में वे पूरी तरह तैयार हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि यदि व्हाइट हाउस से आदेश मिलता है, तो जनरल केन स्वयं सैन्य अभियान का नेतृत्व करेंगे और अमेरिका की जीत सुनिश्चित करेंगे। यह बयान अमेरिकी प्रशासन के भीतर एकता दिखाने की एक कोशिश माना जा रहा है।
राष्ट्रपति के दावों के विपरीत, अमेरिका के प्रमुख समाचार पत्रों ने सैन्य गलियारों में चल रही बेचैनी की ओर इशारा किया है। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनरल केन ने पेंटागन और व्हाइट हाउस में अपनी चिंता व्यक्त की है कि संसाधनों और हथियारों की वर्तमान स्थिति, साथ ही सहयोगी देशों के समर्थन की कमी, अमेरिकी सैनिकों के जीवन को जोखिम में डाल सकती है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने भी दावा किया कि सैन्य कमांडरों ने ट्रंप को चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला करने से अमेरिका की हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense) कमजोर पड़ सकती है। वहीं ‘एक्सियोस’ ने रिपोर्ट किया कि जनरल केन ने अमेरिका के एक लंबे और थकाऊ संघर्ष में फंसने की आशंका जताई है।
रिपोर्टों के अनुसार, केवल सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि ट्रंप के करीबी सलाहकार भी सैन्य कार्रवाई को लेकर संभलकर चलने की सलाह दे रहे हैं। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर ने कथित तौर पर सुझाव दिया है कि किसी भी बड़े हमले से पहले कूटनीतिक विकल्पों को पूरी तरह से आजमाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया है कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना अमेरिका के दीर्घकालिक हितों के लिए बेहतर होगा। हालांकि, ट्रंप ने मीडिया पर “जानबूझकर गलत रिपोर्टिंग” का आरोप लगाते हुए कहा कि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे समझौता पसंद करेंगे, लेकिन विफलता की स्थिति में परिणाम ईरान के लिए अत्यंत भयावह होंगे।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास काफी पुराना है। 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौता तोड़ दिया था और पिछले साल परमाणु ठिकानों पर हमले का विचार भी किया था। वर्तमान में, अमेरिका ने मध्य पूर्व (Middle East) में अपनी सामरिक ताकत को चरम पर पहुंचा दिया है। क्षेत्र में दो विशाल विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers), दर्जनों युद्धपोत, अत्याधुनिक फाइटर जेट और भारी मात्रा में सैन्य संसाधन तैनात किए गए हैं। इन सबके बीच, कूटनीतिक धागा अभी भी जुड़ा हुआ है और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच अगली उच्च स्तरीय बैठक इसी गुरुवार को होने वाली है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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