Trump Gaza Peace Plan 2025
Trump Gaza Peace Plan 2025: पाकिस्तान के सेना प्रमुख और नवनियुक्त फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस वक्त अपने करियर के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई ‘गाजा शांति योजना’ ने पाकिस्तान के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि गाजा में युद्ध के बाद स्थिरता बहाल करने के लिए बनाई जाने वाली ‘स्टेबलाइजेशन फोर्स’ में पाकिस्तान अपने सैनिक भेजे। इस मांग ने पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य मुख्यालय (GHQ) की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह फैसला देश के भीतर एक बड़े विद्रोह को जन्म दे सकता है।
राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वॉशिंगटन जा सकते हैं। पिछले छह महीनों में यह उनकी तीसरी महत्वपूर्ण मुलाकात होगी। ट्रंप की योजना के अनुसार, गाजा में पुनर्निर्माण और सुरक्षा की निगरानी के लिए मुस्लिम देशों की एक संयुक्त सेना बनाई जानी है। हालांकि, कई अरब और मुस्लिम देशों ने इस योजना से दूरी बना ली है। कारण यह है कि इस फोर्स को हमास को निहत्था करने की जिम्मेदारी भी मिल सकती है, जिससे पाकिस्तानी सैनिकों के सीधे संघर्ष में फंसने का खतरा बढ़ जाएगा।
आसिम मुनीर ने ट्रंप के साथ व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंध मजबूत करने में काफी निवेश किया है। जून में व्हाइट हाउस में हुआ लंच इस बात का प्रमाण था कि अमेरिका उन्हें पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में देखता है। यदि पाकिस्तान गाजा में सैनिक भेजने से इनकार करता है, तो ट्रंप की नाराजगी पाकिस्तान को भारी पड़ सकती है। कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अमेरिका से निवेश, कर्ज और सुरक्षा सहायता की उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे में ‘न’ कहना आर्थिक और सामरिक दृष्टि से आत्मघाती साबित हो सकता है।
पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। एक विशाल और अनुभवी सेना होने के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षाएं उससे अधिक रहती हैं। रक्षा विशेषज्ञ आयशा सिद्दीका का मानना है कि आसिम मुनीर पर अपनी सैन्य क्षमता और वैश्विक उपयोगिता साबित करने का भारी दबाव है। भारत और अफगानिस्तान के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच, गाजा जैसे दूरदराज के मोर्चे पर सैनिक तैनात करना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है।
हालिया संवैधानिक संशोधनों ने आसिम मुनीर को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारी बना दिया है। उनका कार्यकाल 2030 तक बढ़ाया जा चुका है और उन्हें वायुसेना तथा नौसेना का भी सर्वोच्च कमांडर नियुक्त किया गया है। आजीवन ‘फील्ड मार्शल’ का पद और कानूनी सुरक्षा मिलने के बाद मुनीर के पास फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन यही ताकत उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बन गई है क्योंकि अब हर विफलता की जिम्मेदारी सीधे उन पर होगी।
सैनिक भेजने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति है। इमरान खान की पार्टी (PTI) और अन्य कट्टरपंथी संगठन पहले से ही सेना के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। यदि पाकिस्तानी सैनिक गाजा जाते हैं, तो विपक्ष इसे ‘इजराइल और अमेरिका के हितों की रक्षा’ के रूप में प्रचारित करेगा। इससे देश में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं। मुनीर जानते हैं कि गाजा की गलियों में बहने वाला पाकिस्तानी सैनिक का खून इस्लामाबाद की सड़कों पर आग लगा सकता है। यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिससे निकलना फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है।
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