Trump on India-Pakistan
Trump on India-Pakistan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हैं। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की हालिया बैठक में ट्रंप ने न केवल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सार्वजनिक रूप से असहज किया, बल्कि दक्षिण एशिया के सैन्य संकट को लेकर हैरान करने वाले दावे भी किए।वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक महज एक कूटनीतिक आयोजन नहीं रही, बल्कि ट्रंप ने अपने भाषण से पूरी दुनिया को हिला दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अपनी कूटनीति से भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ने वाले उस युद्ध को रोका जो करोड़ों जिंदगियां लील सकता था। ट्रंप के इस दावे पर शरीफ की क्या प्रतिक्रिया थी और भारत के ‘ऑब्जर्वर’ स्टेटस का इससे क्या संबंध है? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
बैठक के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति तब पैदा हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सबके सामने खड़े होने का निर्देश दिया। इसके बाद ट्रंप ने खुद को भारत और पाकिस्तान के बीच एक महान “मध्यस्थ” के रूप में पेश करते हुए अपनी उपलब्धियों का बखान शुरू कर दिया। ट्रंप का अंदाज किसी कूटनीतिक चर्चा से अधिक एक शक्ति प्रदर्शन जैसा था, जिससे शरीफ काफी असहज नजर आए। ट्रंप ने इस मंच का उपयोग यह बताने के लिए किया कि कैसे उनकी व्यक्तिगत दखलअंदाजी ने दक्षिण एशिया में एक बड़ी तबाही को टाल दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने सभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वर्ष 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव चरम पर था, तब उन्होंने दोनों देशों को युद्ध रोकने के लिए मजबूर किया था। ट्रंप के अनुसार, उनके हस्तक्षेप की वजह से लगभग 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर थी कि परमाणु शक्ति संपन्न दोनों पड़ोसी देश एक विनाशकारी युद्ध की कगार पर थे, जिसे केवल वाशिंगटन की सख्त चेतावनी ने ही शांत किया।
अपनी “अमेरिका फर्स्ट” और “डील मेकर” वाली छवि को दोहराते हुए ट्रंप ने बताया कि उन्होंने कूटनीति के बजाय आर्थिक दबाव (Tariffs) का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी नेतृत्व को फोन किया। मैंने उनसे साफ कहा कि अगर आप यह विवाद तुरंत नहीं सुलझाते, तो मैं व्यापार समझौते खत्म कर दूंगा और दोनों देशों के उत्पादों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा।” ट्रंप का दावा है कि इस आर्थिक संकट के डर से ही दोनों देश अचानक समझौते के लिए तैयार हो गए।
ट्रंप ने अपने भाषण में सैन्य आंकड़ों को लेकर भी विरोधाभासी बातें कीं। उन्होंने कहा कि उस टकराव के दौरान “11 जेट गिराए गए” और वे बहुत महंगे थे। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले वे सात जेट गिरने का दावा कर चुके थे। भारत ने हमेशा से ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख स्पष्ट है कि 10 मई 2025 के सैन्य गतिरोध के दौरान किसी भी तीसरे पक्ष की कोई मध्यस्थता नहीं हुई थी। भारत के अनुसार, युद्धविराम दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था।
यह पूरा विवाद 22 अप्रैल के ‘पहलाम हमले’ से शुरू हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पीओके (PoK) में सक्रिय आतंकवादी ढांचों को नेस्तनाबूद करना था। ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की सफलता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्ध रोके हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि भारत की सुरक्षा कार्रवाइयां और उनके समाधान द्विपक्षीय थे, न कि किसी अमेरिकी दबाव का परिणाम।
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