Donald Trump : ट्रंप का बड़ा कबूलनामा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद सत्ता परिवर्तन की थी उम्मीद

Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बयान दिया है। फॉक्स न्यूज के साथ एक विशेष साक्षात्कार के दौरान, ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के उद्देश्यों और परिणामों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्वीकार किया कि जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के विरुद्ध यह सैन्य अभियान शुरू किया था, तो उन्हें स्पष्ट रूप से उम्मीद थी कि इसके परिणामस्वरूप ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) संभव हो सकेगा। ट्रंप ने माना कि उस समय उनका आकलन यह था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैन्य कार्रवाई के चलते ईरानी जनता अपनी सरकार के विरुद्ध विद्रोह कर देगी, लेकिन जमीनी हकीकत उम्मीद से कहीं अधिक जटिल और कठोर साबित हुई।

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ईरानी शासन की हिंसक प्रतिक्रिया का गलत आकलन

इंटरव्यू के दौरान जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें अब भी लगता है कि ईरानी नागरिक अपने देश का शासन अपने हाथों में ले सकते हैं, तो उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वहां की जनता सरकारी दमन और हिंसा के डर में जी रही है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने ईरानी शासन की अपने ही नागरिकों के प्रति क्रूरता और उनके दमन की क्षमता को कम करके आंका था। उन्होंने कहा, “मुझे अंदाजा नहीं था कि ईरानी सरकार 50,000 या किसी भी बड़ी संख्या में लोगों को मारने तक के लिए तैयार हो जाएगी।” यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि अमेरिकी प्रशासन को ईरानी नेतृत्व के उस सख्त रुख का आभास नहीं था, जिसके चलते जनता का कोई भी संभावित विद्रोह कुचल दिया गया।

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सैन्य दबाव बनाम सत्ता परिवर्तन की रणनीति

याद रहे कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत के समय, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से सीधे तौर पर अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया था। उस समय अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना, परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाना और वहां के नेतृत्व पर भारी दबाव बनाना था। हालांकि, अब अमेरिका की रणनीति में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। सत्ता परिवर्तन की सार्वजनिक चर्चा के स्थान पर, अब ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक दबाव और सैन्य कार्रवाई के संयुक्त संतुलन पर जोर दे रहा है। हाल के सप्ताहों में ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर अमेरिका के हमलों में तेजी आना इसी नई रणनीति का हिस्सा है।

भविष्य का मार्ग: कूटनीति या बढ़ता सैन्य संघर्ष?

वर्तमान में अमेरिकी प्रशासन का संदेश स्पष्ट है: यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन (Shipping) की स्वतंत्रता सुनिश्चित नहीं करता है, तो सैन्य कार्रवाई का दायरा और अधिक विस्तारित किया जाएगा। ट्रंप का यह रुख संकेत देता है कि अमेरिका अब केवल उम्मीदों के भरोसे नहीं, बल्कि ठोस सैन्य दबाव के जरिए ईरान को अपनी शर्तों पर लाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, ईरानी सरकार ने भी झुकने से इनकार कर दिया है, जिससे मध्य पूर्व में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अंततः, यह स्थिति एक ऐसे नाजुक मोड़ पर है जहाँ कूटनीति की सफलता या विफलता ही इस पूरे क्षेत्र के भविष्य का निर्धारण करेगी।

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Chandan Das

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